अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद महिला प्रकोष्ठ

अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद महिला प्रकोष्ठ

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सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरा?

15/11/2024

आप सभी विप्र जनों को देव दिवाली एवं कार्तिक पूर्णिमा की मंगलमय शुभकामनायें। ईश्वर आप सभी को समृद्ध एवं वैभवशाली जीवन प्रदान करें।

17/09/2024

जनप्रिय, कर्मठ, ईमानदार, आध्यात्मिक व्यक्तित्व के धनी, हम सबके संरक्षक, सर्व समाज मे आदरणीय वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी श्री जुगुल किशोर जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

ुगुल_किशोर_जी_को_जन्मदिन_की_हार्दिक_शुभकामनाएं

19/08/2024

परिषद की समस्त बहनों की ओर से भाई-बहन के अटूट विश्वास एवं स्नेह के पर्व, रक्षाबंधन की सभी भाइयों को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।

12/08/2024

ब्राह्मण समाज, संस्कृति का संरक्षक होता है।

Photos from अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद महिला प्रकोष्ठ's post 04/08/2024

संयुक्त ब्राह्मण संगठन के तत्वाधान में आज राज्य के विभिन्न जिलों से आए स्वजनों ने इको गार्डन पार्क (लखनऊ) में स्व. योगेश उपाध्याय जी के हत्यारों की गिरफ्तारी,परिवार को शस्त्र लाइसेंस व सरकारी आर्थिक सहायता की मांग व उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा अन्यायपूर्ण DIG जुगुलकिशोर तिवारी जी IPS के निलंबन के विरोध में रोष प्रदर्शित किया एवं प्रशासन को ज्ञापन देकर न्यायपूर्ण कार्यवाही की मांग की।

31/07/2024

मध्य प्रदेश राज्य के जिला सिंगरौली की नवनियुक्त जिला अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ ब्राह्मण रीना पांडे जी को नवीन दायित्व की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बहुत-बहुत बधाई

Photos from अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद महिला प्रकोष्ठ's post 29/07/2024

आज दिनांक 29/7/24, दिन सोमवार को "ब्राह्मण समन्वय समिति, कानपुर" के तत्वावधान में
हाथरास के स्वर्गीय योगेश उपाध्याय के परिवार को न्याय दिलवाने, हत्याभियुक्तों की शीघ्र धर-पकड़ हेतु
व डीआईजी पं. जुगलकिशोर तिवारी, IPS के अन्यायपूर्ण निलंबन के विरोध में कानपुर मंडलायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदया को ज्ञापन दिया गया.

27/07/2024

झाँसी जिला के मोंठ कस्बे में स्तिथ भगवान श्री परशुराम जी का मंदिर। खास बात यह है कि ज़ब भी ब्राह्मण समाज के बन्धुओं का कोई आपसी विवाद हो या कोई मीटिंग हो तो समस्त नगर के ब्राह्मण बंधु मंदिर प्रांगण में ही एकत्रित हो कर मुद्दों पर चर्चा /विमर्श करते है।
हर नगर में ऐसा होना चाहिए, आपसी मतभेद /मुद्दों को अपने लोगों के साथ बैठे के हल करना चाहिए। सराहनीय एवं प्रशंसनीय।
जय भगवान परशुराम जी की 🙏🏻

जानकारी साझा कर्ता - सत्तू महाराज

23/07/2024

"मैं आजाद हूं आजाद रहूंगा और आजाद ही मरूंगा" चंद्रशेखर आजाद जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन

आज़ाद जी की संक्षिप्त जीवनी

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक एवं लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा नामक स्थान पर हुआ। आजाद का जन्मस्थान भाबरा अब 'आजादनगर' के रूप में जाना जाता है। उनके पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी एवं माता का नाम जगदानी देवी था। उनके पिता ईमानदार, स्वाभिमानी, साहसी और वचन के पक्के थे। यही गुण चंद्रशेखर को अपने पिता से विरासत में मिले थे।
चंद्रशेखर आजाद 14 वर्ष की आयु में बनारस
गए और वहां एक संस्कृत पाठशाला में पढ़ाई की। वहां उन्होंने कानून भंग आंदोलन में योगदान दिया था। 1920-21 के वर्षों में वे गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़े। वे गिरफ्तार हुए और जज के समक्ष प्रस्तुत किए गए। जहां उन्होंने अपना नाम 'आजाद', पिता का नाम 'स्वतंत्रता' और 'जेल' को उनका निवास बताया।
उन्हें 15 कोड़ों की सजा दी गई। हर कोड़े के वार के साथ उन्होंने, 'वंदे मातरम्' और 'महात्मा गांधी की जय' का स्वर बुलंद किया।
इसके बाद वे सार्वजनिक रूप से आजाद कहलाए। जब क्रांतिकारी आंदोलन उग्र हुआ, तब आजाद उस तरफ खिंचे और 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट आर्मी' से जुड़े। रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में आजाद ने काकोरी षड्यंत्र (1925) में सक्रिय भाग लिया और पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार हो गए।
17 दिसंबर, 1928 को चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और राजगुरु ने शाम के समय लाहौर में पुलिस अधीक्षक के दफ्तर को घेर लिया और ज्यों ही जे. पी. साण्डर्स अपने अंगरक्षक के साथ मोटर साइकिल पर बैठकर निकले तो राजगुरु ने पहली गोली दाग दी, जो साण्डर्स के माथे पर लग गई वह मोटरसाइकिल से नीचे गिर पड़ा। फिर भगत सिंह ने आगे बढ़कर 4-6 गोलियां दाग कर उसे बिल्कुल ठंडा कर दिया। जब साण्डर्स के अंगरक्षक ने उनका पीछा किया, तो चंद्रशेखर आजाद ने अपनी गोली से उसे भी समाप्त कर दिया।
इतना ना ही नहीं लाहौर में जगह-जगह परचे चिपका दिए गए, जिन पर लिखा था - लाला लाजपतराय की मृत्यु का बदला ले लिया गया है। उनके इस कदम को समस्त भारत के क्रांतिकारियों खूब सराहा गया।
अलफ्रेड पार्क, इलाहाबाद में 1931 में उन्होंने रूस की बोल्शेविक क्रांति की तर्ज पर समाजवादी क्रांति का आह्वान किया। उन्होंने संकल्प किया था कि वे न कभी पकड़े जाएंगे और न ब्रिटिश सरकार उन्हें फांसी दे सकेगी।
इसी संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने 27 फरवरी, 1931 को इसी पार्क में स्वयं को गोली मारकर मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दे दी। ऐसे वीर क्रांतिकारी चंद्रशेखर का नाम मन में आते ही अपनी मूंछों को ताव देता वह नौजवान आंखों के सामने जाता है जिसे पूरी दुनिया 'आजाद' के नाम से जानती है।

स्रोत -बेव दुनिया

21/07/2024

अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद परिवार की ओर से आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनायें। जिस प्रकार शिल्पी छैनी से प्रस्तर को साकार रूप देता है उसी प्रकार गुरु आपको अपने ज्ञान, तेज एवं मार्गदर्शन से उच्च एवं सुसंस्कृत विचारों, आदर्शो से संस्कारित करके प्रगतिशील बनाने का कार्य करता है।
आप सभी को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनायें, विशेषकर आप सभी नवीन पीढ़ी को इस पर्व के महत्व, प्रभाव के बारे में जरूर अवगत करायें।
जय श्री परशुराम

20/07/2024

अनुरोध

जय श्री परशुराम भगवान परशुराम जी की 🙏🏻
आप सभी सोशल मीडिया की शक्ति एवं प्रभाव से परिचित है।
शासन स्तर पर दबाब बनाने के लिए एवं आदरणीय पं जुगुल किशोर तिवारी भैया जी की तत्काल बहाली के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर दिनांक आज दिनांक 20 जुलाई दिन शनिवार को शाम 6 बजे

ो_बहाल_करो

हैशटैग के साथ हम सभी ने ट्रेंड चलाने का निर्णय लिया है अतः आप सभी से अपेक्षित सहयोग की आवश्यकता है।-
जिसमे आपको ध्यान पूर्वक बिना भैया का ट्विटर अकाउंट मेंशन करते हुये
आप प्रमुख राष्ट्रीय व प्रादेशिक राजनीतिक दल व उनके ट्विटर हैंडल मेंशन कीजियेगा-





















हमारी बात प्रभावी हो इसके लिए आवश्यकता है कि आप सभी सिर्फ पोस्ट, रिपोस्ट में यही हैशटैग उपयोग करें -

एक्स (ट्वीटर ) पर ट्रेंड बनाने के लिए आवश्यक है -

1.कम से कम 1500 न्यू ट्वीट /पोस्ट 1 घंटे में करनी होगी।
2.आप ऊपर दिए हैशटैग के साथ रिपोस्ट /रीट्वीट क़ी अपेक्षा नई पोस्ट करें।
3.यदि 1 बंधु भी 8- 10 पोस्ट कर दे और 200 लोग भी ट्विटर पर इस ट्रेंड में सक्रिय भागीदारी निभा दे तो एक प्रभावपूर्ण निष्कर्ष मिलने क़ी संभावना बढ़ जाएगी।

12/07/2024

संघर्ष उसी का सार्थक होता है, जिसका वजूद सत्य, निष्ठा एवं निश्छलता से निर्मित होता है। विगत दिनों में आप सभी ने आदरणीय भैया जी पं. जुगुल किशोर तिवारी को जो अपना सहयोग, समर्थन दिया उसके लिए मैं ह्रदय से आप सभी का आभार करती हूँ। आपके प्रयास, समर्थन की गूंज उच्च स्तर (प्रशासन, शासन) तक पहुंची विशेषकर एक्स(ट्विटर ) एवं अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से।
यह भी हम सब जानते है भैया जी को सहयोग सिर्फ इसलिए नहीं मिला कि वह किसी बड़े पद पर आसीन है। या किसी संगठन का समर्थन मिला।उन्हें सभी वर्ग से सहयोग इसलिय मिला कि वह एक सहज, सरल एवं ईमानदार व्यक्तित्व से भूषित है। अपनी यथा शक्ति से उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर हर किसी की मदद की या करने का पूर्ण प्रयास किया।
उनके निस्वार्थ भाव, सहजता, सरलता किसी पद, संगठन से बढ़कर समाज के लिए अर्पित रहें है। इसलिए वह समाज के प्रिय हुये।
लेकिन इसके साथ साथ हमें कुछ बिंदुओं पर भी विचार करना होगा -
इस ग्रुप में 1 लाख से ज्यादा हमारे भाई बंधु परिवार का हिस्सा है लेकिन अभी भी मात्र 10 प्रतिशत से कम ही सक्रिय है ऐसा क्यों? यदि आप सक्षम है, सामर्थ्यवान है तो इसका मतलब कदापि नहीं कि आप समस्याओ से मुक्त है। किसी को किसी भी समय विपरीत परिस्थिति का सामना करना पड़ सकता है, उस समय आवश्यकता है संगठित होने की लेकिन पीड़ा यह है कि सबसे कम एकता यदि किसी समुदाय में है तो वह हम है.. आज सोशल मीडिया का दबाब सरकार पर पड़ता है लेकिन हमारी अल्प संगठित शक्ति हमें कई बार विफल भी कर देती है।
हमें पुनः चिंतन की आवश्यकता है कि क्या कमी है जो अपनों को मजबूत करने से पीछे खींच रही है क्योकि मात्र संगठन बनने से या किसी एक व्यक्ति, आदर्श के सहयोग से हम एकत्रित नहीं होंगे, हर किसी को अपने अंदर के उस जुगुल किशोर को खोजना होगा जो समाज के लिए हमेशा तत्पर है।

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