आपका साथ मेरा हाथ

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एक छोटी सी सकारात्मक प्रेरणा आपकी पुरी ज़िन्दगी बदल सकती है !

30/10/2023

#केरल को धन्यवाद देना चाहता हूं। कितना साहस भरा काम किया है। पिछले 9 सालों से देश में कोई धमाका नहीं हो रहा था। कान तरस गए थे बम धमाके की आवाज सुनने को लेकर। मोदी की आभा दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी। केरल ने मोदी के आभा को तोड़ दिया। केरल में बम ब्लास्ट हुआ।

केरल बहुमत ने फिलीस्तीन समर्थन वाली रैली लगवाया। हमास के लीडर को संबोधन के लिए बुलाया। कल केरल में प्रो फिलिस्तीन रैली को हमास के लीडर का संबोधन हुआ था। आज ज्यूस कन्वेंशन सेंटर में बम धमाका हो गया। दुखद रहा कि कैजुअल्टी एक ही हुई। इंजरी से क्या होता है! धमाके की आवाज दिल्ली तक सुनाई पड़ी। मोदी ने अपनी एजेंसियां भेज दी है।

केरल को शुभकामना। पढ़े-लिखे राज्यों में ऊंचा नाम है। केरल ने इस तमगे में कोई कोताही नहीं होने दी। उत्तर भारत तो धार्मिक उन्माद में बह चुका है। केरल बहुमत तो मानवता के लिए लड़ने वाला राज्य है, फिलिस्तीन का पक्षधर है। हमास से संवेदनाएं रखता है। आईसिस में भर्ती की खबरें भी अब नहीं आ रही थी। मोदी ने पीएफआइ की कमर भी तोड़ रखी है। अब हमास को अपने सदस्यों की भारी कमी पर रही है। एक एक ज्यूस को मारने काटने के लक्ष्य में नई भर्ती की आवश्यकता है। केरल ने अच्छी शुरुआत करी है।

30/10/2023

#अडानी ने बंदरगाह मुफ्त में नही लिए हैं। वो दुनिया की टॉप पोर्ट कम्पनी में से एक है। उसने ऑक्शन में बंदरगाह की बिड जीती हैं। उसका काम टॉप क्लास का है जो सरकारी कम्पनियों से कई बेहतर है। वो उस फील्ड से जुड़ी लॉजिस्टिक, एक्सपोर्ट, इम्पोर्ट हर कम्पनी को किसी से भी बेहतर रिटर्न देता है। उसकी कम्पनी के शेयर होल्डर भी बेहतर रिटर्न पाते हैं। उसके बंदरगाह नेवी के हिसाब से भी किसी अन्य बंदरगाह से ज्यादा डीप हैं जहां बड़े से बड़ा कार्गो या नेवी जहाज डॉक हो सकता है जो युद्ध के समय स्ट्रेटजिक एडवांस सेना और देश को प्राप्त करवाता है। नेवी या कोस्टगार्ड भी उसी के बंदरगाह को मेरीटाइम सिक्युरिटी के लिए इस्तेमाल करती है। उसने मेहनत की इसलिये वो आगे बढ़ा। तुमने हर सरकारी कम्पनी को बर्बाद किया। आज भी तुम सरकारी मतलब पेंशन कहकर भड़काते हो लेकिन कभी सरकारी मतलब मेहनत नही कहते।

ऐसे में उसके पास 24% हिस्सा बंदरगाह में आये या कल को 50%.. जो मेहनत या कॉम्पिटिटिव नही होगा वो बाहर ही होगा। ऐसे ही तुम अम्बानी के लिए भड़काते रहे। आज उसका जिओ 5G है और 6G की तैयारी है। BSNL बर्बाद कर दिया था। अब सरकार ने उस सफेद हाथी क्योंकि स्ट्रेटजिक जरूरत है BSNL की तो उसे रिवाइव करवाया और अगले साल जून तक वो 4G लांच करेगा। कहाँ जिओ 2016 में और कहां BSNL 2024 में.. तुम बाकी जगह भी चाहते हो कि जहां सरकार दुनिया से कॉम्पटीशन(खासकर चीन से) कर रही है वहां बिजनेस की महत्वपूर्ण कड़ी बंदरगाह ऐसे ही सरकारी ख़च्चर की तरह रेंगता रहे। हम यहां चीन से कॉम्पटीशन को डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर बना रहे। लॉजिस्टिक को 16 से 14 और फिर 14 से 12 करते हुए 10 पर ला चीन के समान से सस्ते पर दुनिया को पेश करने के काम मे लगे, वहां बंदरगाह पर यदि अडानी वही सुविधा अपने पैसे पर दे रहा तो वो न लें क्योंकि चीन का हित यहां भी आड़े आ रहा तो तुमको फिर अडानी से मिर्ची लग रही है।

कितना बिकोगे बे कभी चीन तो कभी सोरोस के हाथों?? कभी तो भारत के पक्ष में झूठा ही खड़ा होने का नाटक कर लो। कितनी नफरत है तुम्हे बढ़ते भारत से बे.!!! अपने रहते तुमने चीन के सामान के जरिये भारत को डंपिंग जोन बना डाला। आम भारतीय की धारणा बन गयी कि चायनीज माल है अर्थात घटिया। अपने MSME से लेकर बड़े उद्योग उस सस्ते घटिया माल के सामने टिक नही पाए और बर्बाद हो गए। आज भारत ने चीन को भी क्वालिटी माल बेचने पर मजबूर किया है, धीरे धीरे इसका बिजनेस ही खत्म कर उसे भारतीय माल से रिप्लेस पर काम चल रहा है लेकिन तुम्हारा दर्द खत्म होने का नाम नही ले रहा।

भड़काओ जनता को। मुफ्तखोर तो कम से कम यकीन कर ही लेंगे। लेंगे क्या वो करते ही हैं कि देश बिक गया और अडानी ने खरीद लिया। जैसे अडानी इस देश का नागरिक हो ही न।
बस ये लोग चीन या विदेशी व्यापारियों जो यहां से अरबों छापते हैं उनके खिलाफ कभी एक शब्द नही बोलते कि वो हमें लूट रहे हैं हम जहां तक हो सके विदेशी समान की जगह स्वदेशी को महत्व देंगे। आखिर इटली पार्टी के दलाल खुद भी तो विदेशी के गुलाम जो हैं।

30/10/2023

#कांग्रेस कंधार 2.0 करने का प्लान बना रही है। आपको पता है कि कथित ताबूत घोटाले के नाम पर कांग्रेस ने छाती पीटी कि अटल सरकार ने घोटाला किया जिसका फायदा उन्हें 2004 चुनाव में हुआ। उसके बाद सेम स्ट्रेटजी उन्होंने कथित राफेल घोटाले के समय किया लेकिन वो फेल हो गया। दोनों ही कथित घोटाले कोर्ट में विफल हुए कि कोई घोटाला नही हुआ था लेकिन कोर्ट ने भी कांग्रेस की मदद की और स्टेट चुनाव(शायद यही मध्यप्रदेश आदि थे) कि बाद फैसला दिया तब तक भाजपा इन राज्यों को हार गई थी। कितना असर था या नही इन आरोपों का पर स्ट्रेटजी थोड़ी बहुत काम आ गयी।

अब कंधार 2.0 का प्लान है। कतर वाले पूर्व नौसैनिक उर्फ मर्सनरी के नाम पर अब वैसा ही ड्रामा शुरू करने का प्लान बन चुका है। कंधार के समय उन यात्रियों के घरवालों को मीडिया के सामने ला दिया गया रोने धोने को। खुद सोनिया प्रधानमंत्री आवास के सामने धरने पर बैठ गयी। पूरे देश मे रोते बिलखते चेहरों के साथ ड्रामा चला जिसकी वजह से सरकार ठीक से नेगोशिएट नही कर पाई और उन लोगों को छोड़ना पड़ा जिन्होंने फिर संसद से लेकर पठानकोट हमले किये।

अब वैसे ही नौसैनिकों उर्फ मर्सनरियों के परिवार वालों को टीवी(साथ ही सोशल मीडिया) के माध्यम से फिर रोने धोने को लाने का प्लान है। खुद भी ये लोग जगह जगह रोने धोने का प्लान बना रहे हैं ताकि जनता इमोशनल हो और सरकार को गाली देना शुरू करे। फिर से नेगोसिएशन खराब करने का प्लान है।

नेगोसिएशन खराब के चलते अगर उन लोगों को फांसी हो गयी तो फिर और ज्यादा फायदा हो जाएगा। कतर सबसे पहले फिर ये दबाव बनाएगा कि भारत एन्टी मित्र देश स्टैंड ले। कतर में ही पट्टी के सरगना बैठे रहते हैं। उसी का अल जलजीरा पूरी दुनिया मे मजहबी माहौल और एन्टी भारत माहौल पहले से ही बनवाता है। चीन जिसका वो पालतू है उसका सीधे सीधे फायदा ये है कि मित्र देश से सम्बन्ध खराब होते ही इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर खत्म जो चीन के BRI के खिलाफ बनने जा रहा है। इससे पहले CPEC हमने उसका खत्म कर दिया था तो उसका बदला भी चीन ले रहा है। CPEC का बदला लिया जाएगा तो इसका मतलब है चीन के कहने पर ISI भी इन्वॉल्व है। और कौन इन्वॉल्व है? तो बताने की जरूरत नही कि चीन के साथ यहां कौन MoU करकर बैठा है जिसे कतर के माध्यम से फायदा पहुंचाया जा रहा है और चीन के आदेश पर ये लोग भी कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। इसी आदेश के तहत तो अब तक पट्टी के जघन्य कुकृत्यों पर एक भी शब्द नही बोले जिससे भी समझ आता है कि ये कतर(पट्टी के सरगना जहां है) के साथ और एन्टी मित्र देश स्टैंड लिए हुए हैं।

एक बार पहले जब हम मिडल ईस्ट से रिश्ता सुधारने के प्रयास में थे तो भी चीन-पाकिस्तान को बुरा लगा था। अचानक MeToo शुरू हो गया जिसका कारण था MJ अकबर जो उस समय विदेश राज्य मंत्री इसलिये बनाया था कि मिडल ईस्ट को भारत के पक्ष और पाकिस्तान से दूर किया जाए। उसकी बलि लेते ही अचानक MeToo भी बन्द हो गया और किसी को स्त्री शोषण फिर आज तक नही दिखा। अबकी बार फिर न सिर्फ मित्र देश बल्कि ये सम्बन्ध पूरे मिडल ईस्ट के साथ खराब करने का प्लान है क्योंकि कतर न सिर्फ US और चीन का साझेदार है बल्कि OIC(इस्लामिक मेम्बर देशों) का भी प्रमुख मेम्बर है जिसकी इन संगठनों में जबरदस्त चलती है। MJ अकबर ने इस कदर इन देशों में कूटनीतिक सफलता बनाई थी कि सुषमा स्वराज पहली नेता बनी थी जो नॉन मेम्बर होने के बाद भारत की तरफ से वहां स्पीच दी थी और पाकिस्तान की सुलग गयी कि ये कैसे यहां बुला दी गयी।

भारत ने मिडिल ईस्ट में जो डिप्लोमेसी बनाई थी वो न चीन को पसन्द आयी और न पाकिस्तान को। उनको छोड़िये ये डिप्लोमेसी कभी कांग्रेस को अच्छी नही लगी क्योंकि जो प्रयास इंदिरा ने 1969 में करने का सोचा उसे तब पाकिस्तान ने रोक दिया। इंदिरा कहती रह गयी कि हमारे यहां तुम लोगों से ज्यादा मजहबी हैं पर पाकिस्तान ने एक न चलने दी और जब मोदी सरकार आयी तो चीजें ऐसी पलटी कि वही पाकिस्तान आज भिखारी बना दिया। कई चिढ़ में से एक चिढ़ यही कांग्रेस को आज तक है। अन्य चिढ़ में से एक दो ये हैं कि पाकिस्तान के लिए दिल दिल पाकिस्तान सिर्फ क्रिकेट के फील्ड में कुछ लोगों का नही धड़कता बल्कि आजीवन धड़कता है और वो लोग भाजपा से नफरत और उस पार्टी से मोहब्बत करते हैं जो पाकिस्तान को सर पर बिठाता है। कांग्रेस इस मामले में हमेशा से टॉप पर रही क्योंकि इन्ही लोगों के लिए कांग्रेस ने भगवा एरर भी घोषित कर दिया था। इनके लिए चंगे होने पर बहुसंख्यक जिम्मेदार होगा का कानून लाने वाली थी। ऊपर से कांग्रेस के पाकिस्तान के साथा भगवा एरर, आरएसएस की साजिश जैसे कई राज हैं जिसकी वजह से यदि पाकिस्तान को अगर मोदी सरकार किसी मुसीबत में डालती है तो इस सरकार के खिलाफ कांग्रेस फिर मैदान में उतरती है। पाकिस्तान से मदद भी तो आपने सुनी होगी मोदी को हटाने के लिए जिसका मतलब दिल दिल पाकिस्तान वालों को पाकिस्तान आदेश देगा कि बंटना नही है, एकमुश्त कांग्रेस को वोट देना है।

बस यही खेल चल रहा है। जब ये सत्ता में थे तब भी और आज विपक्ष में हैं तब भी। अब ये यहां विपक्ष के नाम पर पाकिस्तान को सबूत देते हैं जो वो UN में ले जाता है कि भारत मे मजहब खतरे में है, 370 कैसे हटा दिया आदि और पाकिस्तान UN में कहता है कि मोदी के खिलाफ हम नही बल्कि वहां का विपक्ष कह रहा कि वो तानाशाह है। दूसरी तरफ चीन को मिर्ची है कि आजतक जिस कांग्रेस के समय हम फुल कब्जा चालू रखते थे, भारत को डंपिंग जोन भी बना रखा था, खुद कांग्रेस का रक्षा मंत्री बताता था कि बॉर्डर तो हमने ऐसे ही छोड़ रखा है, वहां अब ऐसा कैसे होने लगा कि चीन के समतुल्य इंफ्रा बन रहा है और चीन के सामने मिरर डिप्लॉयमेंट किया जा रहा है। बाकी QAUD से लेकर IMEE ऊपर बता ही चुका हूँ।

इसलिए आगे जब कांग्रेस के ड्रामे शुरू होंगे, कांग्रेस क्या इंडी गिरोह के ड्रामे शुरू होंगे तो आपको पता होना चाहिए कि क्यों और किसके कहने पर ये सब प्लान किया गया है।

30/10/2023

#रेलवे ने प्रोपोजल भेजा है कि "इंडियन" रेलवे से जुड़े सभी नामों को "भारत" से बदला जाए और इसपर काम भी शुरू हो गया है।

जब अचानक से इंडिया की जगह भारत दिखना शुरू हुआ तो भारत से नफरत करने वालों ने फ्रस्ट्रेशन में कहना शुरू किया कि डिजिटल इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, खेलो इंडिया जैसे नाम से इंडिया कब हटा रहे हो।

मैंने लिखा था कि अचानक यदि भारत दिखने लगा है तो निश्चिन्त हो जाइए क्योंकि ऐसे ही सरकार ने भारत को रिप्रजेंट करना शुरू नही किया है। मोदी जी ने लाल किले से कहा था कि गुलामी की निशानियां बदलनी है।

और ये काम धीरे धीरे ही बदलना शुरू होगा। ये लोग जब कलकत्ता का कोलकाता, बेंगलौर का बंगलुरू, बम्बई का मुम्बई, मद्रास का चेन्नई, केरला का केरलम किये तब इनमे से किसी को समस्या नही रही लेकिन जब आप फैजाबाद का अयोध्या करते हैं तो इन्हें आग लग जाती है।

वैसे भी जिनकी सुलगती है उन्हें लगातार सुलगाना चाहिए। एक भी दिन ऐसों का आराम देना हिन्दुराष्ट्र के अनुयायियों के लिए महापाप माना जायेगा।

मोदी का टारगेट 2047 का है। उनके सारे विजन 2047 के हैं। मोदी पप्पू नही हैं जो सिर्फ चुनाव देखते हैं फिर देश चाहे बर्बाद हो जाये। मोदी 2047 तक भारत को हर मायने में "विश्वगुरु' बनाना चाहते हैं। विश्वगुरु जानबूझकर लिख रहा हूँ क्योंकि आजकल ये इस शब्द को अपमानित करने के लिए बेवजह इस्तेमाल करते हैं ताकि इस शब्द की प्रसांगिकता खत्म हो जाये। लेकिन खत्म तो ये होंगे। भारत 2047 में न सिर्फ विकसित राष्ट्र होगा बल्कि पूर्ण रूप से गुलामी से मुक्त होगा जिसमें एक इतिहास कांग्रेस मुक्त देश का होगा।

वैसे भी मोदी जी आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं। शब्दों को आप जैसे मर्जी समझ सकते हैं। एक मतलब तो ये है कि मोदी आजाद भारत मे पैदा हुए पहले प्रधानमंत्री हैं। दूसरा आप समझ ही रहे होंगे।

30/10/2023

#अगर सुप्रीम कोर्ट से भी मनीष सिसोदिया को बेल नहीं मिल पा रही, तो इसका सीधा मतलब है मोदी नेतृत्व में काम करने वाली केंद्रीय एजेंसियां एसी कमरे में बैठकर केस नहीं बनातीं। प्रमाणित होता है कि एजेंसी पूरी निष्ठा से मेहनत करती है और किसी भी मामले को बड़ी गंभीरता से लेकर उस पर कार्य करती हैं।

बहुत गिरफ्तारियां देखी गई हैं। खास कर नेताओं और बड़ी सेलिब्रिटीज की गिरफ्तारी, चार्जशीट फाइल होने से पहले जमानत मिल जाता है। कोई सेलिब्रिटीज तो गंभीर मामलों में दोष सिद्धि के बाद भी जमानत और पैरोल पर आ जाते हैं। लेकिन जब बात मोदी एजेंसी द्वारा बनाई गई मुकदमों की हो, तो पूरी तस्वीर बदल जाती है।

सिसोदिया दिल्ली के अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा मंत्री थे। इतनी बड़ी हस्ती, मामूली सा केस, एक पैसा भी ब्लैक मनी आवास से नहीं धराया, इसके बावजूद सभी अदालतों में जमानत याचिका खारिज हो जा रही है। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सिसोदिया की जमानत आज याचिका खारिज कर दी है।

आम आदमी पार्टी की तरफ से भ्रष्टाचार के पूरे मामले को फिजिकली साफ दिखाने की कोशिश की गई। लेकिन असल मामला तो पॉलिसी घोटाला है। जोकि कैश घोटाले से भी ज्यादा गंभीर है। इसका अर्थ हुआ कि ये लोग बड़े ऊंचे स्तर के भ्रष्टाचारी हैं। जो आमलोगों की समझ में भी ना आए और देशराज सब भी बिक जाए। ऐसे गहन मामलों पर केंद्रीय एजेंसीयों के कार्य बहुत प्रसंसनीय हैं, उनको धन्यवाद।

30/10/2023

#पहली बार तुर्की कुछ अच्छा काम कर रहा है, बधाई दे दो।

दुनिया मे इस समय 50 मुस्लिम बहुल देश है, जिनमे से 22 सेक्युलर है और 28 इस्लामिक है। इन 22 में सिर्फ तुर्की है जो इजरायल के मामले में उलझा हुआ है। यहाँ तक की 28 इस्लामिक देशों में से भी 26 ने खुद को अलग किया हुआ है और शेष 2 मजबूरी में फंसे है।

तुर्की को इस्लामिक बनाने की कोशिश उसके राष्ट्रपति एरडोगन ने की, आज हालत ये है तुर्की की अर्थव्यवस्था ही तबाह हो रखी है। 1 डॉलर में कभी 5 तुर्की लीरा मिलती थी आज 27 मिल जाती है, 5 साल में 5 गुना से ज्यादा महंगाई।

लोगो की क्रय शक्ति घट रही है, तुर्की FATF की ग्रे लिस्ट में बैठा हुआ है इसलिए IMF भी बचाने नही आ रहा है। ऐसे में एरडोगन के पास एक ही विकल्प है जो हर तानाशाह करता है, एरडोगन तुर्की को युद्ध मे झोंक सकता है ताकि लोगो का ध्यान बंट जाए।

लेकिन ये हलवा खाने जितना आसान नही है, क्योकि समुद्र में अमेरिका ने दुनिया का सबसे शक्तिशाली जंगी बेड़ा लगाया हुआ है। यह जंगी बेड़ा अकेले ही पूरी तुर्की के लिये काफी है और ये तो खड़ा ही इसलिए है ताकि इजरायल को कुछ ना हो।

कुल मिलाकर एरडोगन का काम अब बस चीखना चिल्लाना बचा है कर कुछ नही सकते। दूसरी ओर इजरायल ने गाजा के उत्तरी हिस्से में अपने झंडे लगाने शुरू कर दिये है। यदि इजरायल इस हिस्से पर कब्जा कर ले तो कई सुरंगे नाकाम कर सकता है।

हमास की एक बड़ी तैयारी नष्ट होगी तो उसे वापस खड़े करने में बहुत साल लगेंगे। फिलिस्तीन के लोगो से सहानुभूति रखी जा सकती है लेकिन सहानुभूति रखनी ही है तो हम यहूदियों से क्यो ना रखे जो 1300 सालों से सिर्फ विस्थापित हो रहे है।

भारत और अमेरिका के अलावा कोई देश नही है जिसने यहूदियों को शरण दी हो, तुर्की बस भौंकेगा और जब युद्ध का परिणाम सामने आएगा तो आप देखेंगे कि एरडोगन की रेटिंग गिरेगी। क्योकि तुर्की की जनता प्रश्न तो पूछेगी।

एरडोगन का सबसे बड़ा पाप ही यही है कि उसने अपनी सेक्युलर जनता में फिर धर्म का बीज बोया, एरडोगन को कुछ करके दिखाना होगा नही दिखाया तो जनता मार देगी और यदि कुछ करने की कोशिश की तो ऐसी कोशिश सद्दाम हुसैन और गद्दाफी ने भी की थी बाकी इतिहास गवाह है।

इसलिए एरडोगन अंकल आप लगे रहो तुर्की लीरा को और गिराओ तथा तुर्की को डूबा दो ताकि एशिया के गेटवे के लिये सब इजरायल का मुंह ताकने लगे और इजरायल ज्यादा शक्तिशाली हो। बाकी जो भारतीय महाभारत काल मे पौंड्रक नही देख सके वो एरडोगन का मुँह देख ले, देखने का तो पता नही मगर हरकते ऐसी ही थी !

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