05/06/2026
https://youtube.com/shorts/ccEi60Lvtww?feature=share
दिमाग को दिशा जरूरी है दोस्तों इंसान का दिमाग कभी खाली नहीं रह सकता।वह हमेशा विचारों से भ...
Proud to serve the nation
05/06/2026
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दिमाग को दिशा जरूरी है दोस्तों इंसान का दिमाग कभी खाली नहीं रह सकता।वह हमेशा विचारों से भ...
03/06/2026
माननीय राज्यमंत्री असीम अरुण ज़ी को मेरठ के प्रभारी मंत्री बनाए जाने पर ढेरों शुभकामनाएं।
03/06/2026
माता खीर भवानी के चरणों में बिताए कुछ अविस्मरणीय पल
यह फोटो वर्ष 2014 की है, जब जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के दौरान मुझे अपनी कंपनी के साथ वहां तैनात होने का अवसर मिला। हमारा कैंप तुलमुला में एक विद्यालय में स्थापित था, जो Mata Kheer Bhawani Temple से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित था। कर्तव्य की व्यस्तताओं के बीच कई बार माता के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। शायद यह केवल संयोग नहीं, बल्कि माता की कृपा थी कि इतने निकट रहकर उनके दिव्य धाम में बार-बार उपस्थित होने का अवसर मिला।
माता खीर भवानी, जिन्हें माता राग्न्या देवी के नाम से भी जाना जाता है, कश्मीरी पंडितों की आराध्य देवी हैं। मान्यता है कि भगवान हनुमान जी माता को लंका से कश्मीर लेकर आए थे और उनकी स्थापना तुलमुला में हुई। सदियों से यह मंदिर श्रद्धा, आस्था और शक्ति का केंद्र बना हुआ है।
मंदिर की सबसे अद्भुत विशेषता यहां स्थित पवित्र कुंड है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि समय-समय पर कुंड के जल का रंग बदलता है और यह आने वाले शुभ-अशुभ घटनाक्रमों का संकेत देता है। इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं से पहले जल के रंग में परिवर्तन की चर्चाएं प्रचलित रही हैं। चाहे कोई इसे आस्था माने या रहस्य, लेकिन यह स्थान अपने भीतर एक अनोखी आध्यात्मिक ऊर्जा समेटे हुए है।
मुझे आज भी याद है कि जब भी मंदिर परिसर में प्रवेश करता था, तो चिनार के विशाल वृक्षों के बीच स्थित उस शांत वातावरण में मन स्वतः ही श्रद्धा से भर जाता था। चुनावी ड्यूटी के तनाव और जिम्मेदारियों के बीच माता के दर्शन एक अलग ही मानसिक शक्ति और आत्मिक शांति प्रदान करते थे।
आज वर्षों बाद इस फोटो को देखकर वह समय, वह वातावरण और माता की कृपा पुनः स्मरण हो आती है। जीवन में कुछ अवसर केवल अनुभव नहीं होते, वे आशीर्वाद बनकर स्मृतियों में बस जाते हैं।
🚩 माता राग्न्या देवी सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें तथा जीवन में सुख, शांति, शक्ति और समृद्धि प्रदान करें। 🚩
जय माता खीर भवानी! 🙏🌺🚩
01/06/2026
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Thanks
शब्दों से ज्यादा आपकी टोन महत्वपूर्ण है। शब्द महत्वपूर्ण है लेकिन उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है आपकी टोन आप सामने वाले से जिस टोन में बात करेंगे उसकी प्रतिक...
31/05/2026
ज्येष्ठ पूर्णिमा का पावन स्नान... 🌸
आज मन में एक अद्भुत शांति है और जीवन में हर उस चीज़ के लिए कृतज्ञता (Gratitude) का भाव है जो ईश्वर ने दी है। धन और मन, दोनों आज पूरी तरह संतुष्ट और शुद्ध महसूस कर रहे हैं।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा आप सभी पर बनी रहे। शुभ ज्येष्ठ पूर्णिमा! 🙏✨
30/05/2026
"सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो,
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो।
किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं,
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो।"
30/05/2026
https://youtu.be/RNsE9GODtJg
Pls watch now and give your views ...
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Thanks
महिला अबला नहीं महिला वास्तव में कमजोर नहीं होती।उन्हें बोल बोल के कमजोर किया जाता ...
30/05/2026
कन्नौज गंगा तट " मेहंदी घाट" की एक पुरानी शाम के यादगार पल...
शांति..
भक्ति...
आध्यात्म...
शक्ति...
पावन चित्त..
पवित्र वातावरण..
@ कन्नौज
29/05/2026
आज कन्नौज में माननीय राज्यमंत्री Asim Arun जी के कार्यालय पर पुराने साथियों से मुलाकात करके मन प्रफुल्लित हो गया।
बहुत समय बाद अपनों के बीच बैठकर पुराने संघर्ष, यादें और संगठन के साथ बिताए गए क्षण फिर से जीवंत हो उठे।
समय भले आगे बढ़ जाता है, लेकिन साथ चलने वाले लोगों का स्नेह और अपनापन हमेशा मन को ऊर्जा देता है।
ऐसी मुलाकातें केवल संवाद नहीं होतीं, बल्कि वर्षों पुराने विश्वास, आत्मीयता और संबंधों को पुनः मजबूत करने का अवसर भी बनती हैं।
"न्याय में देरी, सबूतों से हेरफेर और व्यवस्थागत साठगांठ: नागरिक सुरक्षा के सामने सबसे बड़ी चुनौती"**
**एक पूर्व सुरक्षाकर्मी की चिंता और देशहित में एक नागरिक की आवाज...
कानपुर में हमारे साथी ITBP जवान के परिवार के साथ घटी हालिया घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) के भीतर गहरे पैठ बना चुके एक बहुत बड़े संकट का प्रतीक है। **मुझे स्वयं ITBP (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) में देश की सेवा करने का अवसर मिला है**, और वर्दी की मर्यादा को करीब से जानने के कारण आज प्रशासनिक तंत्र की यह शिथिलता मुझे और अधिक उद्वेलित करती है।
जब देश का रक्षक खुद अपने परिवार के न्याय के लिए थानों के चक्कर काटने को मजबूर हो, तो हमें एक राष्ट्र के रूप में ठहरकर सोचना होगा कि कानून के शासन (Rule of Law) में कमी कहाँ रह गई है।
1. साठगांठ का 'सिस्टम' और सच पर पड़ता परदा**
संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत हर नागरिक को 'कानून के समक्ष समता' का अधिकार है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत दिखती है। वर्तमान पुलिसिया कार्यप्रणाली में एक खतरनाक आदत विकसित हो गई है—मामलों को लटकाना और टालमटोल करना।
यह टालमटोल केवल प्रशासनिक सुस्ती नहीं है, बल्कि कई बार यह शक्तिशाली और साधन संपन्न दोषियों को कानूनी कमियों (Loop holes) का फायदा उठाने, साक्ष्य छिपाने और 'साठगांठ' करने का अनुचित अवसर देती है। एक सच्चा और पीड़ित व्यक्ति कभी इस साठगांठ के चक्रव्यूह में नहीं पड़ता; वह व्यवस्था पर भरोसा कर अपनी सच्चाई के साथ खड़ा रहता है। लेकिन दुर्भाग्य से, आज की प्रक्रिया सच्चे व्यक्ति को ही थकाकर तोड़ने का काम करती है।
2. केस डायरी और 'स्क्रिप्टेड' न्याय का संकट**
भारतीय साक्ष्य अधिनियम (अब भारतीय साक्ष्य संहिता) और देश की अदालतें पुलिस द्वारा जुटाए गए तथ्यों और केस डायरी के आधार पर निर्णय लेती हैं। यदि शुरुआती स्तर पर ही जांच अधिकारी (IO) द्वारा रसूखदारों के दबाव या लालच में आकर तथ्यों को तोड़-मरोड़ दिया जाए, तो अदालत के सामने एक ऐसी 'स्क्रिप्ट' तैयार हो जाती है जिसे झुठलाना एक आम नागरिक के लिए असंभव हो जाता है।
तथ्यों को इस तरह पिरोया जाता है कि न्याय की आस लगाए बैठा पीड़ित खुद को सच्चा साबित करने की जंग में अकेला पड़ जाता है। इस गलत और प्रभावित प्रक्रिया के कारण आज देश में न जाने कितने निर्दोषों और पीड़ितों को बर्बाद होना पड़ा है।
3. कानपुर मामला: 'फॉरेंसिक साक्ष्यों' के साथ खिलवाड़**
किसी भी आपराधिक या मेडिकल लापरवाही के मामले में **'चेन ऑफ कस्टडी' (Chain of Custody)** और साक्ष्यों का समय पर फॉरेंसिक परीक्षण होना सबसे महत्वपूर्ण कानूनी कदम है। कानपुर मामले में पीड़ित महिला का काटा गया हाथ (जो कि इस केस का सबसे मुख्य साक्ष्य है), दिनों तक थाने में ही अटका रहा।
विधिक रूप से यह अक्षम्य है। हिस्टोपैथोलॉजी (Histopathology) जांच में हुई यह देरी साक्ष्यों को नष्ट या अस्पष्ट कर सकती है। जब वैज्ञानिक तथ्य ही धुंधले हो जाएंगे, तो कल को अदालत में डॉक्टरों या अस्पतालों की लापरवाही साबित करना लगभग असंभव हो जाएगा। न्याय न मिलने की स्थिति में इस प्रशासनिक देरी को पैदा करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।
*देशहित और नागरिक हित में आवश्यक सुधार (हमारा संकल्प):
साक्ष्यों का तत्काल डिजिटलीकरण और संरक्षण: किसी भी गंभीर मामले में फॉरेंसिक साक्ष्यों को बिना किसी देरी के सीधे विशेषज्ञ प्रयोगशालाओं में भेजने की समय-सीमा तय हो और इसकी ऑनलाइन ट्रैकिंग की व्यवस्था हो।
जांच और कानून व्यवस्था का पृथक्करण: जैसा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 'प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ' मामले में निर्देश दिया था, पुलिस की जांच विंग (Investigation) को कानून-व्यवस्था (Law & Order) से पूरी तरह अलग किया जाए ताकि जांच निष्पक्ष और त्वरित हो।
*भ्रष्ट अधिकारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई:* साक्ष्यों में हेरफेर करने या जानबूझकर देरी करने वाले पुलिसकर्मियों पर 'सदाचार के उल्लंघन' और 'साक्ष्य मिटाने की साजिश' के तहत सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
एक सैनिक कभी कर्तव्य से पीछे नहीं हटता, और एक जागरूक नागरिक कभी अन्याय के सामने चुप नहीं बैठता।** यह लड़ाई किसी संस्था के विरोध में नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था को स्वच्छ, पारदर्शी और संवेदनशील बनाने की है, ताकि देश के हर नागरिक को समय पर और सच्चा न्याय मिल सके।
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