05/20/2026
सालों की रुकावटों के बाद अब अपनी मऊ सदर की ज़िंदा दिल और बहादुर अवाम के साथ होने और उनसे रूबरू होने का बेहतरीन अहसास...
अब्बास अंसारी
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05/20/2026
सालों की रुकावटों के बाद अब अपनी मऊ सदर की ज़िंदा दिल और बहादुर अवाम के साथ होने और उनसे रूबरू होने का बेहतरीन अहसास...
अब्बास अंसारी
05/18/2026
आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर जमा यह हुजूम केवल एक धरना नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की आत्मा की आवाज़ है।
यह आवाज़ उन लोगों की आवाज़ है जो संविधान पर भरोसा रखते हैं, जो न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, और जो इस देश में इंसाफ को जिंदा देखना चाहते हैं।
आज हम यहाँ जनाब Azam Khan साहब और भाई Abdullah Azam Khan के समर्थन में खड़े हैं।
लेकिन याद रखिए…
यह केवल दो व्यक्तियों की लड़ाई नहीं है।
यह लड़ाई उस सोच के खिलाफ है जो राजनीतिक मतभेद रखने वालों को खत्म कर देना चाहती है।
यह लड़ाई उस डर के खिलाफ है जो सच बोलने वालों को चुप कराना चाहता है।
साथियों,
आजम खान साहब कोई साधारण नाम नहीं हैं।
उन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा गरीबों, किसानों, नौजवानों और शिक्षा के लिए समर्पित किया।
उन्होंने एक ऐसी यूनिवर्सिटी बनाई जहाँ गरीब का बच्चा भी बड़े सपने देख सके।
उन्होंने संसद से लेकर सड़क तक अपनी आवाज़ हमेशा मजलूमों के लिए उठाई।
लेकिन आज उसी आवाज़ को मुकदमों में उलझाकर कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
एक केस खत्म नहीं होता, दूसरा सामने आ जाता है।
एक सुनवाई पूरी नहीं होती, दूसरी तारीख लगा दी जाती है।
हम पूछना चाहते हैं —
क्या यह सब केवल संयोग है?
क्या यह सब केवल कानून की सामान्य प्रक्रिया है?
या फिर इसके पीछे एक राजनीतिक मानसिकता काम कर रही है?
साथियों,
हम किसी संस्था के खिलाफ नहीं हैं।
हम अदालतों का सम्मान करते हैं।
हम संविधान में विश्वास रखते हैं।
लेकिन लोकतंत्र में सवाल पूछना भी नागरिक का अधिकार है।
जब किसी एक परिवार को लगातार निशाना बनाया जाए…
जब किसी नेता को हर दिन नए मुकदमों में उलझाया जाए…
जब उसके परिवार को मानसिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से तोड़ने की कोशिश की जाए…
तो देश का जागरूक नागरिक सवाल जरूर पूछेगा।
आजम खान साहब ने हमेशा नफरत की राजनीति के खिलाफ मोहब्बत और भाईचारे की बात की।
उन्होंने हमेशा गरीब की आवाज़ बनने की कोशिश की।
उन्होंने हमेशा संविधान की बात की।
और शायद यही बात कुछ लोगों को पसंद नहीं आई।
साथियों,
इतिहास गवाह है —
जो लोग सच बोलते हैं, उन्हें मुश्किलों से गुजरना पड़ता है।
नेल्सन मंडेला ने जेल देखी,
महात्मा गांधी ने संघर्ष देखा,
लोकतंत्र की लड़ाई लड़ने वाले हर इंसान ने तकलीफें झेली हैं।
लेकिन सच को ज्यादा देर तक दबाया नहीं जा सकता।
झूठ के पांव कमजोर होते हैं।
और इंसाफ देर से मिल सकता है, मगर खत्म नहीं हो सकता।
आज यहाँ मौजूद हर नौजवान से मैं कहना चाहता हूँ —
यह लड़ाई केवल आजम खान साहब की नहीं है।
यह लड़ाई आपके भविष्य की भी है।
अगर आज किसी की आवाज़ को दबाया जाएगा और हम खामोश रहेंगे,
तो कल लोकतंत्र केवल किताबों में रह जाएगा।
साथियों,
जंतर-मंतर हिंदुस्तान की लोकतांत्रिक आवाज़ का प्रतीक है।
यहाँ से उठी आवाज़ें हमेशा सत्ता तक पहुँची हैं।
आज यहाँ से भी एक आवाज़ उठ रही है —
कि इस देश में न्याय होना चाहिए।
राजनीतिक प्रतिशोध बंद होना चाहिए।
लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिशें बंद होनी चाहिए।
हम यह भी साफ कर देना चाहते हैं कि हमारा संघर्ष पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक है।
हम पत्थर नहीं उठाएँगे,
हम नफरत नहीं फैलाएँगे,
हम कानून हाथ में नहीं लेंगे।
हम अपनी आवाज़ संविधान के दायरे में उठाएँगे।
क्योंकि हमें अपने देश के संविधान पर भरोसा है।
लेकिन भरोसे का मतलब खामोशी नहीं होता।
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध भी देशभक्ति का हिस्सा है।
आज हम सरकार से कहना चाहते हैं —
राजनीतिक लड़ाई चुनाव के मैदान में लड़िए।
जनता के बीच लड़िए।
विचारों से लड़िए।
लेकिन एजेंसियों और मुकदमों के सहारे विरोधियों को खत्म करने की राजनीति लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
साथियों,
आज हमें यह भी याद रखना होगा कि मुश्किल वक्त इंसान की पहचान कराता है।
जब अच्छे दिन होते हैं, तो भीड़ साथ होती है।
लेकिन जब बुरा वक्त आता है, तब असली साथी सामने आते हैं।
आज यहाँ मौजूद हर व्यक्ति इस बात का सबूत है कि इंसाफ की आवाज़ अभी जिंदा है।
आज भी लोग डर के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं।
आज भी लोग सच के साथ खड़े हैं।
मैं खास तौर पर नौजवानों से कहना चाहता हूँ —
अपने अंदर नफरत मत आने दीजिए।
अपनी लड़ाई को तहजीब और संविधान के दायरे में रखिए।
क्योंकि हमारी ताकत हमारी आवाज़ है, हमारी एकता है, हमारा सब्र है।
और याद रखिए…
जिस दिन जनता जाग जाती है, उस दिन सबसे बड़ी ताकत भी कमजोर पड़ जाती है।
आज हम यहाँ से यह संदेश देना चाहते हैं कि —
हम इंसाफ मांग रहे हैं, एहसान नहीं।
हम संविधान की बात कर रहे हैं, टकराव की नहीं।
हम लोकतंत्र बचाने की बात कर रहे हैं, किसी से दुश्मनी की नहीं।
आइए, पूरी ताकत से आवाज़ बुलंद करें —
“इंसाफ दो! इंसाफ दो!”
“आजम खान साहब को इंसाफ दो!”
“अब्दुल्लाह आजम को इंसाफ दो!”
“संविधान जिंदाबाद!”
“लोकतंत्र जिंदाबाद!”
“नफरत हार जाएगी, मोहब्बत जीतेगी!”
अंत में बस इतना कहना चाहता हूँ —
मुश्किलें चाहे जितनी बड़ी हों,
अगर इरादे मजबूत हों तो अंधेरा ज्यादा देर तक टिक नहीं सकता।
इंशाअल्लाह, सच जीतेगा…
इंशाअल्लाह, इंसाफ जीतेगा…
और लोकतंत्र हमेशा जिंदा रहेगा।
बहुत-बहुत शुक्रिया।
05/17/2026
दिल्ली जंतर मंतर से उठी आजम खान साहब के लिए आवाज
05/15/2026
Siwan Bihar साहेब
05/12/2026
Siwan Bihar साहेब टीम Osama Shahab Sahabuddin Saheb Siwan Osama Shahab vidhayak ji ❤️ Hena Shahab Siwan
05/10/2026
💚💚
05/09/2026
Osama sahab
05/07/2026
Osama sahab sivan