Seema Yadav

Seema Yadav

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व्यवस्था परिवर्तन ही एक मात्र उद्देश्य।

07/05/2023

आज हमारे भतीजे विवेक की शादी मे उपस्थिति रही।ग्राम सभा ककरम् करछना प्रयागराज।

06/05/2023

ये कहानी आपको झकझोर देगी 2 मिनट में एक अच्छी सीख अवश्य पढ़ें....

एक बार एक #हंस और #हंसिनी हरिद्वार के सुरम्य वातावरण से भटकते हुए, उजड़े वीरान और रेगिस्तान के इलाके में आ गये!

हंसिनी ने हंस को कहा कि ये किस उजड़े इलाके में आ गये हैं ??

यहाँ न तो जल है, न जंगल और न ही ठंडी हवाएं हैं यहाँ तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा !

भटकते-भटकते शाम हो गयी तो हंस ने हंसिनी से कहा कि किसी तरह आज की रात बीता लो, सुबह हम लोग हरिद्वार लौट चलेंगे !

रात हुई तो जिस पेड़ के नीचे हंस और हंसिनी रुके थे, उस पर एक उल्लू बैठा था।

वह जोर से चिल्लाने लगा।

हंसिनी ने हंस से कहा- अरे यहाँ तो रात में सो भी नहीं सकते।

ये उल्लू चिल्ला रहा है।

हंस ने फिर हंसिनी को समझाया कि किसी तरह रात काट लो, मुझे अब समझ में आ गया है कि ये इलाका वीरान क्यूँ है ??

ऐसे उल्लू जिस इलाके में रहेंगे वो तो वीरान और उजड़ा रहेगा ही।

पेड़ पर बैठा उल्लू दोनों की बातें सुन रहा था।

सुबह हुई, उल्लू नीचे आया और उसने कहा कि हंस भाई, मेरी वजह से आपको रात में तकलीफ हुई, मुझे माफ़ करदो।

हंस ने कहा- कोई बात नही भैया, आपका धन्यवाद!

यह कहकर जैसे ही हंस अपनी हंसिनी को लेकर आगे बढ़ा

पीछे से उल्लू चिल्लाया, अरे हंस मेरी पत्नी को लेकर कहाँ जा रहे हो।

हंस चौंका- उसने कहा, आपकी पत्नी ??

अरे भाई, यह हंसिनी है, मेरी पत्नी है,मेरे साथ आई थी, मेरे साथ जा रही है!

उल्लू ने कहा- खामोश रहो, ये मेरी पत्नी है।

दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। पूरे इलाके के लोग एकत्र हो गये।

कई गावों की जनता बैठी। पंचायत बुलाई गयी।

पंचलोग भी आ गये!

बोले- भाई किस बात का विवाद है ??

लोगों ने बताया कि उल्लू कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है और हंस कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है!

लम्बी बैठक और पंचायत के बाद पंच लोग किनारे हो गये और कहा कि भाई बात तो यह सही है कि हंसिनी हंस की ही पत्नी है, लेकिन ये हंस और हंसिनी तो अभी थोड़ी देर में इस गाँव से चले जायेंगे।

हमारे बीच में तो उल्लू को ही रहना है।

इसलिए फैसला उल्लू के ही हक़ में ही सुनाना चाहिए!

फिर पंचों ने अपना फैसला सुनाया और कहा कि सारे तथ्यों और सबूतों की जाँच करने के बाद यह पंचायत इस नतीजे पर पहुंची है कि हंसिनी उल्लू की ही पत्नी है और हंस को तत्काल गाँव छोड़ने का हुक्म दिया जाता है!

यह सुनते ही हंस हैरान हो गया और रोने, चीखने और चिल्लाने लगा कि पंचायत ने गलत फैसला सुनाया।

उल्लू ने मेरी पत्नी ले ली!

रोते- चीखते जब वह आगे बढ़ने लगा तो उल्लू ने आवाज लगाई - ऐ मित्र हंस, रुको!

हंस ने रोते हुए कहा कि भैया, अब क्या करोगे ??

पत्नी तो तुमने ले ही ली, अब जान भी लोगे ?

उल्लू ने कहा- नहीं मित्र, ये हंसिनी आपकी पत्नी थी, है और रहेगी!

लेकिन कल रात जब मैं चिल्ला रहा था तो आपने अपनी पत्नी से कहा था कि यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ उल्लू रहता है!

मित्र, ये इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए नहीं है कि यहाँ उल्लू रहता है।

यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ पर ऐसे पंच रहते हैं जो उल्लुओं के हक़ में फैसला सुनाते हैं!

शायद इतने साल की आजादी के बाद भी हमारे देश की दुर्दशा का मूल कारण यही है कि हमने उम्मीदवार की योग्यता न देखते हुए, हमेशा ये हमारी जाति का है. ये हमारी पार्टी का है के आधार पर अपना फैसला उल्लुओं के ही पक्ष में सुनाया है, देश क़ी बदहाली और दुर्दशा के लिए कहीं न कहीं हम भी जिम्मेदार हैँ!

"कहानी" अच्छी लगे तो आगे भी बढ़ा दें......तो.....मेहरबानी.....आपकी ।
यही हाल है हमारे पूरे भारत का
जय भीम
🌹🌹🌹🌹 🇮🇳🇮🇳💗💗💗🌹🌹

22/03/2023

#डोली_में_जाना_और_अर्थी_पर_आना_

#क्यों⁉️❓❓❓

आज मन कुछ खराब सा है... एक पुरानी बात याद आ गई....
शादी के बाद विदाई के समय पिता ने मुझे गले लगाया और भरे गले से बोले...*बेटा अब वही तुम्हारा घर है, बेटी डोली में जाती है और अर्थी में वापस आती है..ये बात हमेशा याद रखना।*
मैं अवाक थी...उनकी नसीहत मुझे धमकी लगी,। क्लास वन के अधिकारी की सोच ऐसी हो सकती है तो आम पुरुषों की सोच का सिर्फ़ अंदाजा ही लगाया जा सकता है ,😔

क्यों हमारे देश में सबसे अधिक बेटियां मरती हैं शादी के बाद??? क्योंकि ऐसी सोच वाले बाप उनकी पहली विदाई के साथ ही बेटियों के लौटने के रास्ते बंद कर देते हैं ।
*अगर कोई बहुत सहनशील हुई तो सहती रहेगी और जिंदा रहेगी ।
*अगर नहीं सह पाई तो बगावत करेगी... जिसमें कुछ जला कर मार दी जाएंगी तो कुछ तलाकशुदा हो जाएंगी।
* जो तलाकशुदा होंगी वो या तो एकल जीवन जिएगीं या दोबारा दबाव में ब्याह दी जाएंगी... और इस बार पहले से भी अधिक दवाव रहेगा यह साबित करना कि वो तो बहुत अच्छी हैं।

हम औरतें अपने बाप को तो नहीं सुधार सकते लेकिन अपने बेटों में यह #मैन्यूफैक्चरिंग_डिफेक्ट पहले से ही दुरुस्त कर सकते हैं ताकि जब वो किसी बेटी का पिता बनें तो अपनी बेटियों को गले लगा कर ये कहे... *बिटिया!! ये घर पहले भी तेरा था, आज भी तेरा है और हमेशा तेरा रहेगा। मेरे दिल के दरवाज़े हमेशा तेरे लिए खुले हैं... कुछ भी होने पर बेझिझक चली आना...जब तक तेरा बाप जिंदा है...तुझ पर कोई उंगली भी नहीं उठा सकता।*

01/02/2023
16/06/2022

बुद्ध के राह पर चलिए।

Photos from Seema Yadav's post 25/06/2021

बहुजन मुक्ति पार्टी का जलवा।
विधानसभा करछना।
इलाहाबाद उत्तर प्रदेश।
9140728118

Photos from Seema Yadav's post 24/06/2021

मिशन 2022 उत्तर प्रदेश
विधानसभा चुनाव
उत्तर प्रदेश के हर विधान सभा मे बहुजन मुक्ति पार्टी का वाल पेंटिंग अभियान जोर शोर से चल रहा है।
UP मांगे BMP
पार्टी का सदस्य बनने के लिए संपर्क करें।
9140728118

16/03/2021

भारत में आज तक ये ही पढ़ाया गया था, कि *गांधी ने साइमन कमीशन का विरोध किया* ,, लेकिन ये नहीं पढ़ाया जाता कि *तीन शख्स* थे जिन्होंने *साइमन कमीशन* का स्वागत किया।।
इन तीन शख्स के नाम निम्न है -
1- ओबीसी से चौधरी सर छोटूराम जी। जो पंजाब से थे।
2- एससी से डॉक्टर अम्बेडकर। जो महाराष्ट्र से थे।
3- ओबीसी शिव दयाल चौरसिया जो यूपी से थे।।
अब सवाल ये उठता है कि गांधी ने साइमन का विरोध क्यों किया?
क्योंकि 1917 में अंग्रेजो ने एक एक कमेटी का गठन किया था,, जिसका नाम था साउथ बरो कमिशन,, जो कि भारत के शूद्र अति शूद्र अर्थात आज की भाषा में एससी एसटी और ओबीसी के लोगों की पहचान कर उन्हें हर क्षेत्र में अलग अलग प्रतिनिधित्व दिया जाए,, और हजारों सालों से वंचित इन 85% लोगों को हक अधिकार देने के लिए बनाया गया था,, उस समय ओबीसी की तरफ से शाहू महाराज ने भास्कर राव जाधव को,, और एससी एसटी की तरफ से डॉक्टर अम्बेडकर को इस कमीशन के समक्ष अपनी मांग रखने के लिए भेजा।। लेकिन ये बात बाल गंगाधर तिलक को अच्छी नहीं लगी और उन्होंने कोल्हापुर के पास अथनी नाम के गांव में जाकर एक सभा लेकर कहां कि तेली,, तंबोली,, कुर्मी कुनभ्ट्टों को संसद में जाकर क्या हल चलाना है।। इस तरह विरोध होने के बाद भी अंग्रेजो ने तिलक की बात को नहीं माना और 1919 में अंग्रजों ने एक बात कहीं कि भारत के ब्राह्मणों में भारत की बहु संख्यक लोगों के प्रति नयायिक चरित्र नहीं है।।
इसे ध्यान में रखते हुए 1927 में साइमन कमीशन 10 साल बाद फिर से भारत में एक ओर सर्वे करने आया,, कि इन मूलनिवासी लोगों को भारत छोड़ने से पहले अलग अलग क्षेत्र में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए,,, इस साइमन कमिशन में 7 लोगों की एक आयोग की तरह कमेटी थी,, जिसमे सब संसदीय लोग थे।। इसलिए इसमें उन लोगों को शामिल नहीं किया जा सकता था,, जो लोग भारत के मूलनिवासी लोगों के हक़ अधिकार का हमेशा विरोध करते थे,, जब यह कमिशन एससी एसटी और ओबीसी लोगों का सर्वे करने भारत आया तो,, गांधी,, लाला लाजपराय,, नेहरू और आरएसएस ने इसका इतना भयंकर विरोध किया कि कई जगह साइमन को काले झंडे दिखाए गए,, लाला लापतराय ने इसलिए अपने प्राण दे दिए,, चाहे मै मर भी क्यों न जाऊं लेकिन इन शूद्र अति शूद्र लोगों को एक कोड़ी भी हक अधिकार नहीं मिलने चाहिए। गांधी ने लोगों को ये कहकर विरोध करवाया कि इसमें एक भी

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