Samrat Ashok Club Prayagraj

Samrat Ashok Club Prayagraj

Share

Samrat Ashok Club promotes Nationalism by renaissance of original culture of Bharat.

03/05/2026

बुद्ध पूर्णिमा - वैशाख महोत्सव पर सम्राट अशोक क्लब भारत शाखा भदोही द्वारा आयोजित कार्यक्रम। राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रभारी माननीय Awadhesh Maurya जी के वक्तव्य।

#वैशाख_पूर्णिमा
#गौतम_बुद्ध

03/05/2026

बुद्ध पूर्णिमा - वैशाख महोत्सव पर सम्राट अशोक क्लब भारत शाखा भदोही द्वारा आयोजित कार्यक्रम। राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रभारी माननीय Awadhesh Maurya जी के वक्तव्य।

#वैशाख_पूर्णिमा
#गौतम_बुद्ध

Photos from Samrat Ashok Club Prayagraj's post 02/05/2026

बुद्ध पूर्णिमा - वैशाख महोत्सव पर सम्राट अशोक क्लब भारत शाखा भदोही द्वारा आयोजित कार्यक्रम।

#वैशाख_पूर्णिमा
#गौतम_बुद्ध

Photos from Samrat Ashok Club Prayagraj's post 01/05/2026

अन्तर्राष्ट्रीय त्रिविध पावनी महापर्व वैशाख पूर्णिमा/बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर समस्त जनमानस को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं।
आज #वैशाख_पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर मैं सम्पूर्ण विश्व में शांति, करुणा, मैत्री और सौहार्दपूर्ण वातावरण की कामना करता हूँ। तथागत गौतम बुद्ध के धम्म मार्ग पर चलते हुए सम्पूर्ण मानव समाज में मानवता जागृत हो, जिससे सबका मंगल और कल्याण हो सके—यही मेरी मंगल कामना है।
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में, जहाँ एक ओर युद्ध के कारण पूरी मानवता व्यथित है, ऐसे समय में तथागत गौतम बुद्ध के धम्म की आवश्यकता और अधिक महसूस होती है। वैश्विक शांति के लिए युद्ध नहीं, बल्कि बुद्ध के धम्म की जरूरत है।
यह पावन दिन भगवान तथागत #गौतम_बुद्ध के जन्म, संबोधि और महापरिनिर्वाण का प्रतीक है। उनकी शिक्षाएं हम सभी को आंतरिक शांति, करुणा, मैत्री, मानव कल्याण और धम्म मार्ग की ओर प्रेरित करती हैं। इस अवसर पर हम सभी को वैश्विक शांति और समाज में सौहार्द बढ़ाने के लिए अपना योगदान देना चाहिए।
बुद्ध पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर मैं समस्त विश्व में मानवता, सद्भावना, आपसी प्रेम, भाईचारा, करुणा और मैत्री के साथ सभी के सुखमय जीवन की मंगल कामना करता हूँ।
#बुद्ध_पूर्णिमा

30/04/2026

पावन पर्व वैशाख पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर आप सभी को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं।
यह पावन पर्व हमें करुणा, मैत्री, शांति और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। आइए, हम सब मिलकर अपने जीवन में सदाचार, धैर्य और मानवता को अपनाएं। 🪔☸️

#बुद्ध_पूणिमा

30/04/2026

#2589वें त्रिविध पावनी वैशाख #बुद्धपूर्णिमा (01 मई 2026, दिन-शुक्रवार) के मंगल अवसर पर आप सभी धम्म बन्धुओं को हार्दिक बधाई, मंगल कामनाएं, जय भारत, नमो बुद्धाय ।

#करुणा बुद्धिज्म का मूल तत्व है। मानव समाज में करुणा के अनेक रूप हैं जैसे प्रेम, दया, प्यार और मुहब्बत आदि । करुणा के अतिरिक्त #मानवता के धम्म कार्यों की प्रधानता भी #बुद्धिज्म की एक अपनी अलग पहचान है।

मानवता और करुणा एक दूसरे के सम्पूरक हैं, जो व्यक्ति जितना अधिक करुणाशील होगा वह उतना ही मानवता के कार्यों को क्रियाशील करेगा और तो और बार - बार मानवता के कार्यों को करने से मानव हृदय में करुणा की बढ़ोत्तरी होती है।

बुद्धिज्म को परिभाषित करते हुए प्रसिद्ध वैज्ञानिक और भौतिक शास्त्री #अल्बर्टआइंस्टीन ने कहा था कि "बौद्ध धर्म भविष्य का धर्म होगा।" उन्होंने यह भी कहा था कि यदि कोई धर्म आधुनिक वैज्ञानिक आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है, तो वह बौद्ध धर्म ही है ।

#बुद्धिज्म का मुख्य लक्ष्य मानव को मानव बनाना होता है। कोई भी व्यक्ति त्रिशरण, पंचशील, अष्टशील और दस पारमिताओं को अपनाकर एक सभ्य मानव बन सकता है। सभ्य मानव ही समता,करुणा, स्वतंत्रता और मानवता का एक सभ्य मानव समाज का निर्माण कर सकता है।

#बुद्धिज्म के 2500 वर्षों के सफल इतिहास में दान, ध्यान और त्याग का भी अपना महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।

#बुद्धिज्म का विशेष ध्यान पद्धति #विपासना आज भी अनेक लोगों को #शारीरिकस्वास्थ्य और #मानसिकशान्ति प्रदान कर रहा है।

#बुद्धिज्म के विकास में #दान का अद्वितीय योगदान रहा है। चाहे अनाथपिंडक का जेतवन महाविहार हो या बिम्बिसार का वेणुवन महाविहार हो या सुजाता का पूर्वाराम महाविहार, सभी #दान से ही निर्मित थे। यहां तक आधुनिक काल में #पालीभाषा, #बुद्धिज्म के क्षेत्र विशेष और #धम्मलिपि के पठन के महान कार्य के क्रम में मा. जेम्स प्रिंसेज महोदय जी ने #दानं शब्द को सबसे पहले पढ़ने में सफलता प्राप्त किए थे।

#बुद्धिज्म के प्रसार और मानव को सभ्य बनाने के क्रम में #त्याग के अनेक उदाहरण हैं। बुद्ध स्वयं अपना राज- पाठ, पिता, पुत्र, शाक्य परिवार और पत्नी का #त्याग किए थे। सम्राट अशोक महान #बुद्धिज्म के प्रचार और प्रसार में अपने पुत्र और पुत्री को समर्पित कर दिए थे।

01 मई 2026 को #2589वें त्रिविध पावनी वैशाख #बुद्धपूर्णिमा महोत्सव विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी बुद्धिज्म अपने के मूल तत्व समता, स्वतंत्रता, मानवता, करुणा, प्रज्ञा, सील और समाधि के भविष्य को और सुदृढ़ करेगा।

#बुद्धपूर्णिमा

#त्रिविधपावनीबुद्धपूर्णिमा
#बुद्धजयंती
#वैशाखपूर्णिमा
#01मई

29/04/2026

#2589वें त्रिविध पावनी वैशाख #बुद्धपूर्णिमा (01 मई 2026, दिन-शुक्रवार) के मंगल अवसर पर आप सभी धम्म बन्धुओं को हार्दिक बधाई, मंगल कामनाएं, जय भारत नमो बुद्धाय ।

#बुद्ध_धम्म के विकास और #बुद्धिज्म के इतिहास में बौद्ध साहित्य का एक महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यद्यपि सभ्यता और संस्कृति के विकास के क्रम में और तथागत गोतम बुद्ध के समय से लेकर अगले कई सौ वर्षों तक #बुद्ध_धम्म के मंगल सुक्त एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक मौखिक ही हस्तांतरित होते रहे तथा समय समय पर अनेक बौद्ध संगतियों के माध्यम से परिष्कृत, सुरक्षित और संरक्षित होते रहे।

#बुद्धिज्म के विकास की यात्रा में महाविहारों का अपना अलग योगदान रहा है। #जेतवनमहाविहार श्रावस्ती और #वेणुवनमहाविहार राजगृह बुद्ध के दौर के सबसे उत्कृष्ट महाविहार थे। ये वही महाविहार हैं जहां सर्व लोक कल्याण और मानवता के बुद्ध धम्म संदेश स्वयं तथागत गोतम बुद्ध के मुख से निकले थे और यहीं से बुद्ध के प्रमुख शिष्यों (भिक्खुओं) द्वारा मौखिक कंठस्थ कर लिए गए थे।

बुद्ध धम्म सुत्तों का भविष्य में पुनः उपयोग, उनकी महत्ता को और सुदृढ़ तथा ऐतिहासिक बनाने के लिए बुद्ध के महापरिनिर्वाण के कुछ समय बाद बुद्ध धम्म की पहली संगीति का आयोजन किया गया। उसके बाद लगभग 100 वर्षों के अंतराल पर चार महासंगीतियों का आयोजन हुआ।

यद्यपि इतिहास वर्णित है कि लेखन कला का विकास बहुत बाद में हुआ। लेखन कला से पहले केवल मौखिक ही बुद्ध धम्म सुत्त सभ्यता, संस्कृति और मानवता हेतु मानव समाज में प्रचारित और प्रसारित होते रहे।

बुद्ध धम्म को अक्षुण्य बनाने का पहला कार्य सम्राट अशोक महान जी ने किया। उन्होंने बुद्ध के धम्म सुत्तों को लोहे की कलम से शिला लेखों, स्तंभ लेखों और गुहा लेखों पर अंकित कराकर उन्हें अमरता प्रदान किए। ये पत्थर किताब ही बुद्ध धम्म के सबसे पहले #लिखितबौद्धसाहित्य हैं।

बुद्ध धम्म के प्रचार प्रसार में बौद्ध साहित्य का अपना विशेष योगदान रहा है। बुद्ध धम्म की हजारों पुस्तकें प्रत्येक सदी में लिखी गई हैं। विनय पिटक, सुत्त पिटक और अभिधम्म पिटक विश्व प्रसिद्ध बौद्ध साहित्य हैं। तीन निकायों (1.दीघ निकाय,2.मज्झिम निकाय 3. संयुक्त निकाय ) जातक कथाओं और धम्म पद गाथाओं का भी बौद्ध साहित्य में अपना महत्वपूर्ण स्थान है। नालन्दा महाविहार और तक्षशिला महाविद्यालय के पुस्तकालय बौद्ध साहित्य से भरे पड़े थे।

बुद्धिज्म को आधुनिकता और वर्तमान स्वरूप देने में चीनी यात्रियों का यात्रा वृत्तांत का बहुत योगदान रहा है। इन्हीं यात्रियों के प्रमुख पुस्तकों के अध्ययन से अलेक्जेंडर कनिंघम महोदय ने आधुनिक विश्व को सारनाथ, श्रावस्ती, वैशाली, बोधगया और कुशीनारा जैसे अनेक करुणासील और सुरम्य बौद्ध स्थल उपहार स्वरूप दिए।

20 वीं सदी में राहुल सांकृत्यायन जी ने अनेक बौद्ध साहित्य को तिब्बत से अपने देश भारत लाए । राहुल सांकृत्यायन जी स्वयं अनेक बौद्ध साहित्यों की रचना किए और विभिन्न भाषाओं में उनका अनुवाद किए। वर्तमान समय में डॉ राजेंद्र प्रसाद सिंह जी अनेक पुस्तकों जैसे इतिहास में घूमता हुआ धम्म चक्क, बौद्ध सभ्यता की खोज, खोए हुए बुद्ध की खोज, बौद्ध इतिहास की एक झलक, इतिहास का मुआयना जैसे अनेक ज्ञानोपयोगी किताबों की रचना किए हैं, जिनसे आसानी से बुद्ध धम्म संघ को समझा जा सकता है।

आज सर एडविन अर्नोल्ड द्वारा लिखित #लाइटऑफएशिया और नोवेल पुरस्कार विजेता जर्मन लेखक हरमन हेस द्वारा लिखित #सिद्धार्थ नामक बौद्ध साहित्य ने भी विदेशों में बुद्ध धम्म संघ को प्रचार और प्रसार करने में अपना अमूल्य योगदान दिया है।

कहने का आशय यह है कि बुद्धकाल से लेकर वर्तमान समय तक प्रत्येक सदी में बौद्ध साहित्य लिखे और पढ़े गए हैं। आज भी अनेक लेखकों द्वारा बुद्ध धम्म से सम्बन्धित बौद्ध साहित्य रचे जा रहे हैं। इन्हीं बौद्ध साहित्यों की देन है,कि बुद्ध धम्म आज भी स्वयं को मानव समाज में स्थापित होते हुए पूरी दुनिया को सभ्यता, संस्कृति, मानवता और विश्व शान्ति का धम्म संदेश दे रहा है।

साधु साधु साधु।
भवतु सब्ब मंगलं।।

#बुद्धपूर्णिमा

#त्रिविधपावनीबुद्धपूर्णिमा
#बुद्धजयंती
#वैशाखपूर्णिमा
#01मई

27/04/2026

त्रिविध पावनी वैशाख बुद्ध पूर्णिमा (01 मई 2026, दिन-शुक्रवार) के मंगल अवसर पर आप सभी धम्म प्रेमी बन्धुओं को हार्दिक बधाई, मंगल कामनाएं, नमो बुद्धाय।

मित्रों! जैसा कि आप सभी अवगत हैं कि सम्यक सम्बुद्ध, शाक्यमुनि तथागत गोतम बुद्ध के जैविक मानवीय जीवन से संबंधित तीन महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं "जन्म, प्रज्ञा (ज्ञान) की प्राप्ति और मृत्यु (महापरिनिर्वाण दिवस)"से सम्बन्धित त्रिविध पावनी बुद्ध पूर्णिमा महापर्व आगामी 01 मई को पूरे भू-लोक में समता, स्वतंत्रता, मानवता और अहिंसा के मानवीय परिवेश में करुणा, प्रज्ञा, सील, समाधि के साथ मनाया जाएगा।

प्रत्येक मानव इस पृथ्वी पर एक स्वतंत्र इकाई (बच्चा) के रूप में जन्म लेता है और अपने पूरे जीवन काल के जैविक मानवीय कार्यों को संपादित करते हुए एक सम्यक मानव बनने का प्रयास करता रहता है। मानव बनने के क्रम में ही प्रत्येक मानव जाने /अनजाने में बुद्ध के पंचशील सिद्धांतों का सहज ही पालन करता है। बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग और दस पारमिताओं को अपनाकर मानव मानवता के कार्यों को सृजित करते हुए एक सभ्य मानव समाज का निर्माण करता है।

बुद्ध के पंचशील सिद्धांत विद्यार्थियों को करुणाशील,विवेकशील सीलवान, प्रज्ञावान छात्र बनाते हैं। तथागत का यह धम्म -संदेश कि,मैं केवल मार्गदाता हूं, केवल रास्ता दिखा सकता हूं, चलना आपको स्वयं होगा, विद्यार्थियों को स्वयं पर विश्वास करने तथा किसी भी परिस्थितियों में उन्हें धैर्य के साथ सदैव आगे बढ़ने का हौसला तथा साहस देता है, जिससे वे ऊंची से ऊंची शिक्षा प्राप्ति के लिए प्रत्यनशील रहते हैं।

प्राकृतिक सत्य को जानने और समझने के लिए सम्यक सम्बुद्ध बुद्ध द्वारा प्रतिपादित "प्रतीत्यसमुत्पाद (Dependent Origination)" बौद्ध धर्म का केंद्रीय सिद्धांत है, जो कार्य-कारण संबंध (Cause and Effect) को दर्शाता है। इसका अर्थ है-"कारण पर आश्रित होकर किसी वस्तु का उत्पन्न होना। यह बताता है कि सब कुछ आपस में जुड़ा है और कुछ भी स्वतंत्र नहीं है

तथागत गोतम बुद्ध द्वारा स्थापित विशेष ध्यान पद्धति "विपासना"आज भी लोगों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ -साथ मंगल मैत्री के मानवीय जैविक मूल्यों युक्त समता का मानव समाज बनाने में सहयोग कर रहा है।

आज जब आधुनिकता और भौतिकता में दुनिया धन, दौलत तथा दिखावा की अंधी आंधी में कहीं खो सी गई, तब ऐसे परिवेश में बुद्ध और बुद्ध के धम्म ज्यादा प्रांसगिक महसूस हो रहे हैं। वैश्विक इतिहास में अहिंसा और मानवता के कार्यों केलिए बुद्ध के धम्म -संदेश आज भी प्रेरणास्रोत बनें हुए हैं।

बुद्ध और उनका पूरा शाक्य परिवार आज वैश्विक इतिहास का महत्वपूर्ण पठनीय और लिखनीय विषय बिंदु बन चुका है वह भी बिना धन, दौलत या दिखावा के। मानवता, करुणा और अहिंसा के विश्व इतिहास के कई पन्नों पर बुद्ध जी की कई पीढ़ियों का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है, जिसमें पिता- शाक्य शुद्धोधन, माता -महामाया, मौसी -प्रजापति गौतमी, पत्नी- यशोधरा, पुत्र -राहुल आदि लोक प्रसिद्ध हैं।

#बुद्धपूर्णिमा

#त्रिविधपावनीबुद्धपूर्णिमा
#बुद्धजयंती
#वैशाखपूर्णिमा
#01मई

Photos from Samrat Ashok Club Prayagraj's post 16/04/2026

सम्राट अशोक क्लब की ओर से माननीय सम्राट चौधरी Samrat Choudhary जी आपको बिहार राज्य के मुख्यमंत्री पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने पर हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं प्रेषित करते हैं। यह हमारे लिए अत्यंत हर्ष एवं गर्व का विषय है कि आपके नेतृत्व में राज्य नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर होगा।

हम आशा करते हैं कि आप पूर्व मुख्यमंत्री माननीय नीतीश कुमार जी द्वारा स्थापित समावेशी विकास, सामाजिक न्याय एवं सांस्कृतिक समृद्धि की परंपरा को और अधिक सुदृढ़ करेंगे। उनके नेतृत्व में राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को जो नई दिशा मिली है, वह निश्चित ही प्रेरणादायक है।

हमें पूर्ण विश्वास है कि आपके कुशल नेतृत्व में बिहार न केवल आर्थिक दृष्टि से प्रगति करेगा, बल्कि सांस्कृतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में भी नई उपलब्धियाँ प्राप्त करेगा। सम्राट अशोक क्लब सदैव बिहार के विकास एवं सांस्कृतिक उत्थान में सक्रिय सहयोग प्रदान करता रहेगा।

हम आपके उज्ज्वल, सफल एवं जनकल्याणकारी कार्यकाल की कामना करते हैं।

Want your business to be the top-listed Government Service in Allahabad?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Category

Telephone

Address


Saraipitha, Dhanupur Handia Prayagraj
Allahabad
221503