Allahabadies

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Allahabadi.in हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई,
यहाँ सब इलाहाबादी है मेरे भाई ||

28/09/2020

पराया धन
______________________
अधरों पर खिली मुस्कान वो
मेरे बगिया की शान है वो
चिड़ियों सी चहकती रहती है,
बाबा की अपने जान है वो I

जब जब पायल छनकाती है,
खुशियाँ घर मे भर जाती है,
वो बेला की लता सी फैलकर,
घर आँगन महकाती है।

उसकी मीठी बोली कोयल सी
कानो में रस भर जाती है,
उसका वो फुदकना चिड़िया सा
घर मेरा रौशन कर जाती है।

छोटी सी उमर में उसका युँ,
हरपल चिन्ता करना अपनो का,
उसमे मुझे अपने बचपन का
प्रतिबिंब दर्शन करवाती है I

बेटी तो पराया धन होती है,
मन मेरा ये मान ना पाता है,
कैसे कर दू अपना अंश अलग मैं,
ये सोच के दिल घबराता है।

दुनियां की निर्मम रीत ये
क्यूँ हर कोई निभाता हैं,
जो अपने ही तन का हिस्सा हो,
क्यूँ ना जीवन भर रख पाता है।
_________________________
स्वरचित ( मंजू कुशवाहा)

चित्र _गुगल आभार

27/09/2020
13/05/2018

मातृत्व दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...

23/04/2018

रहू कही भी थोडा सा इलाहाबाद लिए फिरता हूँ

सौजन्य से- अमर उजाला

10/10/2017

*तेरी बुराइयों* को हर *अख़बार* कहता है,

और तू मेरे *गांव* को *गँवार* कहता है //

*ऐ शहर* मुझे तेरी *औक़ात* पता है //

तू *चुल्लू भर पानी* को भी *वाटर पार्क* कहता है //

*थक* गया है हर *शख़्स* काम करते करते //

तू इसे *अमीरी* का *बाज़ार* कहता है।

*गांव* चलो *वक्त ही वक्त* है सबके पास !!

तेरी सारी *फ़ुर्सत* तेरा *इतवार* कहता है //

*मौन* होकर *फोन* पर *रिश्ते* निभाए जा रहे हैं //

तू इस *मशीनी दौर* को *परिवार* कहता है //

जिनकी *सेवा* में *खपा* देते थे जीवन सारा,

तू उन *माँ बाप* को अब *भार* कहता है //

*वो* मिलने आते थे तो *कलेजा* साथ लाते थे,

तू *दस्तूर* निभाने को *रिश्तेदार* कहता है //

बड़े-बड़े *मसले* हल करती थी *पंचायतें* //

तु अंधी *भ्रष्ट दलीलों* को *दरबार* कहता है //

बैठ जाते थे *अपने पराये* सब *बैलगाडी* में //

पूरा *परिवार* भी न बैठ पाये उसे तू *कार* कहता है //

अब *बच्चे* भी *बड़ों* का *अदब* भूल बैठे हैं //

तू इस *नये दौर* को *संस्कार* कहता है *........//*

✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻

पढ़ने के बाद मैं रोक न सका
और आप सभी के बिच समर्पित किया !!!

Photos from Allahabadies's post 15/08/2017

Happy Independence day to all..

23/07/2017

आप आज़ाद थे और हमेशा आज़ाद रहेगे।

भारत माँ के अमर सपूत #शदीदचंद्रशेखरआज़ाद के जन्मदिन पर हार्दिक नमन ।

23/03/2017

*शहादत को सलाम*

इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे जज़्बातों से,
अगर मैं इश्क़ लिखना भी चाहूँ तो इंक़लाब लिखा जाता है।

-शहीद भगतसिंह

23/03/2017

Jai hind..

23/02/2017

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