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VOICE of bettiah
हम बेतिया के खबरे तस्वीरें शेयर करते हैं.
साथ ही देश के मुद्दों पर हल्की-फुल्की चुटकी भी लेते हैं।
14/06/2026
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री अब बोल अब कोई बोलते रे 🤭
13/06/2026
प्रिय Sanjay Jaiswal चचा ये पाटलिपुत्र से बगहा आने वाली ट्रेन हैं.
आपके क्षेत्र के निवासी इस ट्रेन मे जानवर की तरह सफर करते हैं क्या ये आपको सोभा देता हैं की आपके वोटर ऐसी स्तिथि से गुजरे.
बेतिया राज कचहरी.
11/06/2026
बिहार की राजनीति में नेपोटिज्म: विरासत का बोझ
बिहार की राजनीति नेपोटिज्म (परिवारवाद) की जंगली आग में जल रही है। इसकी सबसे नई और चर्चित मिसाल है नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार का राजनीतिक उदय। इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर आए निशांत को कुछ ही समय में जेडीयू में अहम पद और स्वास्थ्य मंत्री जैसी जिम्मेदारी सौंपी गई। पिता की सत्ता और संगठन का सहारा लेकर वे बिना किसी लंबे संघर्ष या साबित प्रदर्शन के सीधे सत्ता के केंद्र में पहुंच गए। यह बिहार के युवाओं के लिए स्पष्ट संदेश है — मेरिट नहीं, रक्त संबंध मायने रखता है।
यह परंपरा नई नहीं है। लालू प्रसाद यादव के परिवार ने तो इसे और भी खुलेआम अपनाया। उनके बेटे तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री बने, तेज प्रताप यादव मंत्री रहे — परिवार के लगभग हर सक्रिय सदस्य को राजनीति में जगह मिल गई। राजद पूरी तरह परिवारवादी पार्टी बन चुकी है। इसी तरह कांग्रेस, बीजेपी और अन्य छोटे दलों में भी नेता अपने बेटे-बेटियों, भतीजों और रिश्तेदारों को टिकट और पद देते दिखते हैं। बिहार की राजनीति अब ‘परिवार की संपत्ति’ जैसी हो गई है।
बिहार पर पड़ रहा नकारात्मक प्रभाव
इस नेपोटिज्म ने बिहार को गहरी चोट पहुंचाई है:
योग्यता की हत्या: सच्चे, मेहनती और विजन वाले युवा नेता हाशिए पर धकेल दिए जा रहे हैं। सत्ता परिवार के हाथों में केंद्रित होने से फैसले व्यक्तिगत वफादारी और परिवार हित पर आधारित हो जाते हैं, न कि विकास और सुशासन पर।
विकास में रुकावट: बिहार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और उद्योग में पिछड़ा हुआ है। परिवारवादी नेतृत्व में न तो नई सोच आती है और न ही जवाबदेही। निशांत कुमार जैसे नए चेहरे भी पिता की छाया से बाहर निकलकर कुछ ठोस काम दिखाने में अभी तक असफल नजर आते हैं।
युवाओं में निराशा: बिहार के लाखों पढ़े-लिखे युवा या तो दिल्ली-मुंबई भाग रहे हैं या राजनीति से मुंह मोड़ रहे हैं। जब देखते हैं कि ऊपर पहुंचने का रास्ता सिर्फ ‘पापा का नाम’ है, तो उनकी आकांक्षा और मेहनत का गला घोंट दिया जाता है।
भविष्य में और बुरा असर पड़ेगा। अगर यह सिलसिला जारी रहा तो बिहार की राजनीति और भी सिकुड़ जाएगी। सक्षम प्रशासन की जगह परिवार-केंद्रित, भ्रष्ट और अक्षम शासन स्थापित हो जाएगा। विकास की गति धीमी रहेगी, निवेशक दूर भागेंगे और बिहार ‘परिवारों का गुलाम’ राज्य बनकर रह जाएगा। लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होंगी क्योंकि आम voter को लगेगा कि उसकी भागीदारी सिर्फ वोट देने तक सीमित है, सत्ता तो वंशानुगत है।
समय आ गया है कि बिहार की जनता नेपोटिज्म को अस्वीकार करे। नेताओं से पूछा जाए — अपने बेटे को मौका देने से पहले, क्या आपने बिहार के बेटों को मौका दिया? जब तक परिवारवाद चलेगा, बिहार का सच्चा उत्थान सिर्फ सपना बना रहेगा।
बेतिया राज.
09/06/2026
103 बीघा जमीन पर क्या बनने जा रहा है? डॉ. Sanjay Jaiswal के प्रयास से चंपारण को मिल सकती है बड़ी सौगात
बेतिया: महात्मा गांधी की कर्मभूमि चंपारण एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। पश्चिम चंपारण के चनपटिया स्थित गांधी आश्रम वृंदावन की 103 बीघा भूमि को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आया है, जिसने क्षेत्र में नई उम्मीदें जगा दी हैं।
गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, नई दिल्ली ने इस भूमि पर एक भव्य "गांधी स्मृति केंद्र" स्थापित करने की इच्छा जताई है। इसके लिए समिति के निदेशक द्वारा पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी को औपचारिक पत्र भेजा गया है। प्रस्ताव के अनुसार यहां गांधी जी के विचारों, आदर्शों और चंपारण सत्याग्रह की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त केंद्र विकसित किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि प्रस्तावित केंद्र में गांधी साहित्य पर शोध, पुस्तकालय, प्रशिक्षण कार्यक्रम, युवाओं के लिए प्रेरणादायक गतिविधियां, प्रदर्शनी हॉल तथा ग्राम विकास से जुड़े कार्यक्रम संचालित किए जा सकते हैं। यदि यह परियोजना धरातल पर उतरती है तो चंपारण को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की संभावना और मजबूत होगी।
इस पूरी पहल में पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल की सक्रिय भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में इस संबंध में हुई बैठक और पत्र सौंपे जाने की तस्वीरों ने इस प्रस्ताव को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है और क्या चंपारण को जल्द ही गांधी स्मृति केंद्र जैसी ऐतिहासिक सौगात मिलने वाली है? आने वाले दिनों में इस पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।
आपकी राय क्या है?
क्या चंपारण में गांधी स्मृति केंद्र बनना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।
Source:- ANN 24
09/06/2026
छावनी ओवर ब्रिज से अगर आप मैनाटांड़ रोड में आते हैं तो जैसे ही आप ओवर ब्रिज से उतरेगी आपको यह गड्ढा देखने को मिल जाएगा इस के बारे में आप लोग का क्या रहा है राय जरूर बताएं।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व गंडक नदी
प्रकृति की खूबसूरती
मादा घड़ियाल अपने बच्चों के साथ.
07/06/2026
बेतिया मे रील बना रहे 2 युवकों की नहर मे डुबाने से मौत.
मृतकों की पहचान बारी टोला निवासी धर्म कुमार पिता विनोद यादव और करण कुमार पिता नन्दलाल महतो बताया जा रहा हैं.
दोनों युवक अपने कुछ दोस्तों के साथ अमवा मझार स्तिथ गंडक नहर के किनारे घूमने गए थे इसी दौरान रील बनाते हुए संतुलन बिगड़ने से दोनों गहरे पानी मे गिर गए और तेज लहरों मे बह गए.
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