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अपने आप से ईमानदार रहें
कर्म का सिद्धांत (निष्काम कर्म):
"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।"
अर्थात, तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने पर है, उसके फल पर नहीं। जब हम परिणाम की चिंता छोड़कर केवल अपने प्रयास पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो तनाव खुद-ब-खुद समाप्त हो जाता है।
कभी भी *व्यक्ति* अपनी *चाहत* से नहीं बदलता... *आगे* वाले का *व्यवहार* और *विचार,* उन्हें *परिवर्तित* करने पर मजबूर कर देता है!!!
आज ये बात और भी ज्यादा सही होती जा रही है please like and subscribe my page p
इमानदारी की कीमत आज भी है मेरे दोस्तों :
कई बार ऐसा सच में महसूस होता है कि जो लोग सीधे, ईमानदार और दिल से साफ होते हैं, उन्हें उतनी कद्र नहीं मिलती जितनी चालाक या “गेम खेलने” वाले लोगों को मिल जाती है। क्योंकि दुनिया अक्सर परिणाम देखती है, इरादे नहीं। जो लोग लोगों को प्रभावित करना जानते हैं, अपनी छवि बनाना जानते हैं, वे जल्दी आगे दिखते हैं।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सच्चाई या अच्छाई की कोई कीमत नहीं है।
बहुत सीधे और अच्छे लोग अक्सर दो गलतियाँ कर बैठते हैं:
* वे अपनी अच्छाई के साथ अपनी सीमाएँ तय नहीं करते।
* वे मान लेते हैं कि हर कोई उनके जैसा सोचता होगा।
दिल से अच्छा होना बहुत बड़ी बात है, लेकिन अगर उसके साथ आत्मसम्मान, समझदारी और “ना” कहने की ताकत न हो, तो लोग उसका फायदा उठा लेते हैं।
साफ दिल होना कमजोरी नहीं है — बस उसके साथ थोड़ा विवेक और मजबूती भी चाहिए।
और एक बात और:
जो लोग ऊपर तक पहुँचते दिखते हैं, जरूरी नहीं कि अंदर से शांत भी हों। कई लोग बाहर से सफल दिखते हैं लेकिन रिश्तों में भरोसा, सच्चा अपनापन और मानसिक सुकून खो देते हैं।
जबकि सच्चे लोग कम लोगों के करीब होते हैं, लेकिन जो लोग उन्हें समझते हैं, वे सच में दिल से जुड़ते हैं।
इसलिए खुद को बदलकर कठोर या नकली बनाना जरूरी नहीं है।
बस इतना जरूरी है कि:
* हर किसी पर तुरंत भरोसा न करें,
* अपनी अच्छाई की रक्षा करें,
* और यह समझें कि अच्छा इंसान होना और कमजोर होना — दोनों अलग बातें हैं।
दुनिया हर समय अच्छे लोगों को तुरंत सम्मान नहीं देती, लेकिन लंबे समय में भरोसा, चरित्र और सच्चाई की कीमत हमेशा रहती है।
भारत के संविधान के अनुसार, निर्वाचित सदस्य पूरे समुदाय का प्रतिनिधि होगा, न कि किसी विशेष धर्म या जाति का। बंगाल निर्वाचित प्रतिनिधि
An elected member will be representative of the whole community not a particular religion or caste by the constitution of india electted representative
जिनके पास है आज सत्ता, और सिर पर स्वर्ण ताज है,
वो समझते हैं कि मुट्ठी में, उनके सारा आज है।
गरीबों की लाचारी पर, जो हँसते हैं अभिमान में,
वो भूल गए कि वक्त का पहिया, चलता है हर हाल में।
नहीं रहेगी ये ताकत सदा, न ये ऊँचा नाम रहेगा,
वक्त की तेज़ आंधी में, बस नेक काम रहेगा।
आज जो ऊँचे महल में हैं, कल खाक में मिल जाएँगे,
जो आज दूसरों को रुलाते हैं, वो खुद भी आँसू बहाएँगे।
सिकंदर भी गया खाली हाथ, न साथ कुछ ले पाया था,
शक्ति का वो सारा नशा, मिट्टी में ही समाया था।
कमजोर को तुम कमजोर न समझो, ईश्वर उसके साथ है,
बदलती है किस्मत सबकी, ये कुदरत की ही बात है।
गर्व न कर अपनी हस्ती पर, ये वक्त बड़ा बलवान है,
आज तेरी तो कल किसी और की, यही जीवन का विधान है।
बारी सबकी आती है, कोई बच नहीं पाएगा,
जो बोया है इस जीवन में, वही काट कर जाएगा
01/05/2026
मां तो मां होती है ना .....😭....🙏🙏🙏🙏
💔 मां-बेटे की हृदय विदारक कहानीइस हादसे की सबसे दुखद खबर तब आई जब बचाव दल ने एक मां और उसके 4 साल के बेटे का शव बरामद किया। दिल्ली का यह परिवार छुट्टी मनाने आया था।अंतिम आलिंगन: मां और बेटे के शव गहराई में एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए मिले।जीवन रक्षक जैकेट: मां ने डूबते समय अपने बेटे को बचाने की आखिरी कोशिश में एक ही लाइफ जैकेट को दोनों के चारों ओर लपेटने का प्रयास किया था।परिवार: इस हादसे में पिता और बेटी तो बच गए, लेकिन मां-बेटे की जान चली गई।
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