31/05/2026
धन्यवाद उत्तरजन टुडे पर
जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करने और सतत संघर्ष के लिए मिले इस सम्मान पर मैं सभी शुभचिंतकों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि जनसरोकारों, पारदर्शिता, जवाबदेही और आम जनता के अधिकारों की आवाज़ का सम्मान है।
आप सभी के स्नेह, विश्वास और सहयोग से आगे भी जनहित के मुद्दों को पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ उठाता रहूँगा।
आप सभी का प्रेम, आशीर्वाद और समर्थन यूँ ही बना रहे।
विकेश सिंह नेगी
आरटीआई एक्टिविस्ट, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता ⚖️
28/05/2026
नमस्कार,
बीकेटीसी में कथित वित्तीय अनियमितताओं, व्याप्त भ्रष्टाचार एवं दान-चढ़ावे के धन के दुरुपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण प्रेस विज्ञप्ति संलग्न है। कृपया जनहित के इस विषय को अपने प्रतिष्ठित मीडिया माध्यम में उचित स्थान प्रदान करने की कृपा करें।
आंख में धूल झोंकने की कवायद है बीकेटीसी अध्यक्ष द्वारा गठित जांच समिति, प्रदेश सरकार करे उच्चस्तरीय जांच
अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के विरुद्ध लगे आरोपों की जांच कौन करेगा ..?
सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी द्वारा केदारनाथ धाम में वीआईपी मेहमानों पर मंदिर कोष से खर्च मामले में गठित जांच समिति को जनता की आंख में धूल झोंकने की कवायद बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बीकेटीसी में व्याप्त गड़बड़ियों के लिए एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित करने मांग की है।
गौरतलब है कि अधिवक्ता नेगी द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद से बीकेटीसी लगातार चर्चाओं में है। मीडियाकर्मियों द्वारा जांच समिति के बावत प्रतिक्रिया पूछे जाने पर नेगी ने आज कहा कि सोशल मीडिया पर तमाम सवाल उठने के बाद बीकेटीसी ने अपनी छीछालेदर से बचने के लिए जांच समिति गठित की है।
उन्होंने बीकेटीसी द्वारा गठित जांच समिति को औचित्यहीन बताया है। उन्होंने कहा कि सूचना अधिकार में केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित को ग्यारह लाख रुपये की धनराशि जारी करने की बात भी सामने आई है। इससे संबंधित पत्रावली को मंदिर समिति के वित्त अधिकारी को बायपास कर सीधे अध्यक्ष द्विवेदी द्वारा अनुमोदित किया गया है। इतनी बड़ी धनराशि तीर्थ पुरोहितों को बांटना मंदिर कोष का दुरूपयोग है।
सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने यह भी आरोप लगाया कि बीकेटीसी के एक उपाध्यक्ष विजय सिंह कपरवान द्वारा अपनी पत्नी को अपना चपरासी दिखा कर बारह हज़ार रुपए प्रतिमाह भुगतान लिया जा रहा है। इसके अलावा कपरवान रुद्रप्रयाग में आवास व कार्यालय भत्ते के रूप में पच्चीस हज़ार रुपये प्रतिमाह ले रहे हैं। जबकि उपाध्यक्ष के लिए राजधानी देहरादून में कार्यालय आवंटित है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या बीकेटीसी अध्यक्ष द्वारा गठित जांच समिति इन प्रकरणों की भी जांच करेगी..? उन्होंने अध्यक्ष द्विवेदी की जाँच समिति को अर्थहीन बताया और कहा कि अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के विरुद्ध लगे आरोपों पर कौन जांच करेगा ? उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश सरकार वास्तव में बदरीनाथ व केदारनाथ जैसे धामों में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर गंभीर है तो उसे उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित करनी चाहिए।
27/05/2026
“हम वर्षों से हिंदू-मुस्लिम की बहसों में उलझे रहे,
लेकिन क्या कभी उतनी शक्ति से अपनी आस्था, अपने मंदिरों और अपने धामों में फैलते भ्रष्टाचार के विरुद्ध खड़े हुए?
आज बदरी-केदार जैसे सनातन धर्म के सर्वोच्च आस्था केंद्रों में यदि दान के धन पर वीआईपी संस्कृति पल रही हो, श्रद्धालुओं के पैसे से नेताओं की मेहमाननवाज़ी हो रही हो, मंदिर संपत्तियों पर कब्ज़े और सौदों की चर्चाएँ सामने आ रही हों — तो यह केवल आर्थिक भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि सनातन की आत्मा पर प्रहार है।
जिस धन को भक्त अपनी मेहनत, विश्वास और श्रद्धा से भगवान के चरणों में अर्पित करते हैं, वह धन यदि सत्ता, विशेषाधिकार और भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ जाए, तो यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ विश्वासघात है।
सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि धर्म के नाम पर सबसे अधिक शोर मचाने वाले अनेक संगठन भी ऐसे मामलों में मौन दिखाई देते हैं।
क्या धर्म केवल नारों के लिए है?
क्या सनातन केवल राजनीति का मंच बनकर रह जाएगा?
क्या मंदिरों की पवित्रता, पारदर्शिता और श्रद्धालुओं का सम्मान अब किसी की प्राथमिकता नहीं?
यदि आज भी हिंदू समाज नहीं जागा,
यदि आज भी श्रद्धालु एकजुट नहीं हुए,
तो आने वाला समय हमारे धामों को आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और वीआईपी संस्कृति के अड्डों के रूप में याद करेगा।
अब समय आ गया है —
मौन तोड़ने का।
प्रश्न पूछने का।
दान के हर पैसे का हिसाब मांगने का।
और अपने धामों, अपनी संस्कृति और अपनी सनातन परंपरा की रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़े होने का।”
26/05/2026
“मंदिरों में वीआईपी संस्कृति आखिर कब तक?
श्रद्धालुओं के दान का पैसा भक्तों की सुविधा, चिकित्सा और व्यवस्थाओं पर खर्च होना चाहिए, न कि नेताओं की हेलीकॉप्टर यात्रा और वीआईपी मेहमाननवाज़ी पर।
धर्म आस्था का विषय है, विशेषाधिकार का नहीं!”
26/05/2026
दान के 11 लाख से ‘डैमेज कंट्रोल’..? केदार सभा के विरोध के दो दिन बाद बीकेटीसी ने खोला खजाना
-BKTC ने तीर्थ-पुरोहितों को बांटे 11 लाख, RTI खुलासे के बाद फंड दुरुपयोग के आरोप
-मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उच्चस्तरीय जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग
-श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ ? चढ़ावे के इस्तेमाल पर बीकेटीसी कटघरे में
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) धामों में तीर्थ यात्रियों को सुविधा तो नहीं दे पा रही है। मगर श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे के पैंसे की मनमाने तरीके से बंदरबांट करने में लगी हुई है। गत वर्ष केदारनाथ के तीर्थ-पुरोहितों की संस्था केदार सभा द्वारा बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का विरोध किए जाने के बाद उन्हें नियम विरुद्ध तरीके से ग्यारह लाख रूपये का भुगतान कर दिया गया।
बीकेटीसी में व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दों को लगातार उठा रहे सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर यह आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में तीर्थ पुरोहितो की संस्था 'केदार सभा' ने वर्ष 2013 की आपदा में दिवंगत आत्माओं की शांति हेतु केदारनाथ धाम में श्रीमद भगवत कथा का आयोजन किया था। कथा का आयोजन 25 जुलाई से 01 अगस्त, 2025 तक हुआ था।
अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने बताया कि आयोजन संपन्न होने के करीब ढाई माह बाद 12 अक्टूबर, 2025 को आनन-फानन वाले अंदाज में बीकेटीसी के सहायक लेखाकार और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के स्तर से अलग-अलग नोट शीट तैयार की गईं। प्रशासनिक अधिकारी के स्तर से तैयार नोट शीट में कथा का आयोजन किये जाने के दृष्टिगत केदार सभा के अनुरोध पर ग्यारह लाख रुपये की स्वीकृति के संबंध में आख्या दी गई। इस नोट शीट पर तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी विजय थपलियाल समेत उपाध्यक्ष विजय सिंह कप्रवाण व अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के हस्ताक्षर हैं।
सहायक लेखाकार वाली नोट शीट में आयोजन संपन्न होने का उल्लेख करते हुए ग्यारह लाख रुपये स्वीकृत करने के बारे में आख्या दी गई है। नोट शीट में सहायक लेखाकार से लेकर मुख्य कार्याधिकारी व उपाध्यक्ष कप्रवाण के हस्ताक्षर हैं। सभी ने अपने हस्ताक्षरों के साथ 12 अक्टूबर, 2025 की तिथि अंकित की है।
अधिवक्ता विकेश नेगी ने बताया कि आश्चर्य की बात है कि दोनों नोट शीट और बिल में कहीं पर भी बीकेटीसी में नियुक्त वित्त नियंत्रक की सहमति नहीं ली गई, जो कि पूरी तरह से वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा नोट शीट में केवल यह उल्लेख किया गया है कि केदार सभा ने आर्थिक सहयोग का अनुरोध किया है। मगर यह उल्लेख नहीं है कि केदार सभा ने लिखित में अनुरोध किया अथवा मौखिक ? यदि केदार सभा ने लिखित में अनुरोध किया था तो वह पत्र आरटीआई में उपलब्ध नहीं कराया गया।
अधिवक्ता विकेश नेगी ने कहा कि विगत वर्ष 10 अक्टूबर को केदार सभा ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की कार्यशैली के खिलाफ आक्रोश जताते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की थी। केदार सभा ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को बाकायदा पत्र लिख कर आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध होने के दो दिन बाद आनन-फानन में जिस तरह से केदार सभा को 11 लाख की धनराशि स्वीकृत की गयी, उससे यह स्पष्ट है की अध्यक्ष द्वारा बीकेटीसी के धन को अपने व्यक्तिगत प्रबंधन में खर्च किया गया।
अधिवक्ता विकेश नेगी ने मंदिरों के धन और दान- चढ़ावे के दुरूपयोग को श्रद्धालुओं की आस्था के साथ गहरा छल बताया और कहा कि ऐसा लगता है कि बीकेटीसी अध्यक्ष यात्रा व मंदिरों के प्रबंधन के बजाय अपने व्यक्तिगत प्रबंधन में लगे हुए हैं। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर कार्रवाई की मांग की है।