तुम ज़ुल्म के ख़िलाफ़ कैसे नारा लगाओगे
तुम्हारे
मुँह में तो खैरात का निवाला है..
Sanatan karni sena Voice of india
Main Bharat Hun "sarv samaj ke adhikar ki awaaj"
अनिल अंबानी का 100₹ का बैंक लोन मुकेश अंबानी 8₹ में ख़रीद रहे है.."विश्वगुरु" का "बिग डिस्काउंट ऑफर"..लूटो और ख़ूब लूटो..
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★ अनिल अंबानी की कंपनी "रिलायंस इंफ्राटेल इंडिया लिमिटेड" (RTIL) का टोटल क़र्ज़ लगभग 44,000 करोड़ है..
★अनिल अंबानी ने #क़र्ज़ नही चुकाया गया और 2018 में दिवालिया हो गए.. #आज भी शान ओ शौकत से रहते है..
😡★RTIL के पास 1.78 लाख किलोमीटर के "फाइबर एसेट्स" और लगभग #44,000 मोबाइल टावर है..
👉 अब मुकेश अंबानी की कंपनी #3,720 करोड़ में #44,000 करोड़ का लोन सेटल कर रही है.. #केवल 8% में लोन ख़त्म हो जाएगा..
मेरा एक प्रोपोज़ल है : अनिल अंबानी की कंपनी को #भारत सरकार 5000 करोड़ दे कर ख़रीद ले और BSNL में लगा दे..BSNL को दिया जाए..1 साल में भारत की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बन जाएगी..
मोदी जी हमारा पैसा है देश का पैसा है आप अपनी सिर्फ अपने मित्रों के लिए हमारे देश से गद्दारी क्यों करते ही जा रहे??
2__ @किसानो को कभी इतनी राहत दिया?
@विद्यार्थियों को कभी राहत दिया??
@आम जनता महंगाई से परेशान आपके भ्रामक नीतियों में उलझी हुई है कभी सोचा आप प्रधान हमारे संरक्षक हैं हम किससे पूछे जब आपको हमने चुना??
जुल्म अंग्रेजों से भी अधिक हो रहा आम आवाम पर
💐 हिंदुस्तान की अवाम की सोच को श्रद्धांजलि
!!
sangeetasingh
10/03/2023
अपनी बेटी के विवाह से पहले उसे शिक्षित बनाओ,
ताकि वह आसानी से अच्छे-बुरे का फर्क कर सके।
#सावित्रीबाई_फुले
🙏💐
#अन्तरराष्ट्रीय_महिला_दिवस (8 मार्च): विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार के प्रतीक तथा उनके आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उत्सव दिवस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की सभी को #शुभकामनाएं।
#नारी तुम प्रेम हो,आस्था हो, विश्वास हो, टूटी हुई उम्मीदों की एक मात्र आस हो।
#उठो अपने अस्तित्व को संभालो, केवल एक दिन ही नहीं हर दिन के लिए तुम खास हो।।
इस अवसर पर मैं एक ऐसी रानी का जिक्र कर रहा हूँ, जिसने युद्ध में जाते अपने पति को निशानी मांगने पर अपना सिर काट कर भिजवा दिया था। ताकि मातृभूमि की रक्षा के लिए दुश्मन से युद्ध करते समय वह उसकी याद में विचलित ना हो। यह हाड़ी रानी (सलह कंवर) बूंदी (राजस्थान) के हाडा चौहान शासक की बेटी और उदयपुर (मेवाड़) के सलुम्बर ठिकाने के रावत चुण्डावत की रानी थी।
स्त्री सामर्थ्य और स्त्री सशक्तिकरण की बात करने वालों के लिए ऐसा अप्रतिम उदाहरण केवल राजस्थान की मिट्टी पर ही मिल सकता हैं, जहाँ अपने पति को कर्तव्य बोध करवाने के लिए एक नवविवाहिता पत्नी स्वयं अपना शीश काट कर भेंट कर देती हैं, यह सोच कर कि कहीं युद्ध में जा रहा उसका पति प्रेम मोह में बंध कर युद्ध में अपने पराक्रम का कौशल न दिखा पाए या युद्ध से पीठ न दिखा जाए। ऐसी हाड़ा राजकुमारी सलह कंवर पूरे विश्व के इतिहास में हाड़ी रानी के नाम से विख्यात हो गई और आधी दुनियां का प्रतिनिधित्व करने वाले महिलाओं के लिए त्याग और समर्पण एक नया इतिहास रच गई। राजस्थान की धरती पर वीर प्रसुताऐं अपनी संतान को पालने में ही वीरता का पाठ पढ़ाती हैं.....
“इला न देणी आपणी, हालरिया हुलराए
पूत सीखवे पालणै मरण बड़ा ही माय।”
राजस्थान की इस वीर प्रसूता धरती पर जहाँ बप्पा रावल, महाराणा कुंभा, महाराणा सांगा, महाराणा प्रताप, दुर्गादास राठौड, गौरा बादल, हम्मीर का शौर्य पला बढ़ा, तो अपने स्वाभिमान और सतीत्व की रक्षा के लिए यहाँ की वीरांगनाऐं सहर्ष जौहर की ज्वाला मे कूद पड़ी। चाहे वह महारानी पद्मिनी हो या हाड़ीरानी कर्मावती या फिर रणथंभौर में जल जौहर करने वाली रानी रंगादेवी हो। राजस्थान की इस धरती पर एक नहीं अनेक जौहर हुए हैं, जो वीरांगनाओं के बलिदान को याद दिलाता हैं। इन्हीं वीरांगनाओं की श्रृंखला में एक नाम हाड़ी रानी (सलह कंवर) का भी है जो अपने अप्रतिम बलिदान से न केवल भारत में अपितु सम्पूर्ण विश्व के इतिहास में राजस्थान की धरती के साथ अपनी जन्मस्थली ‘बून्दी’ और कर्मस्थली ‘सलूम्बर’ का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित कर गई। बून्दी की धरती को अपने बलिदान से गौरवान्वित करने वाली रानी कर्मावती, जिसने सैंकड़ों वीर छत्राणियों के साथ जौहर किया, तो 17वीं शताब्दी मे जन्मी हाड़ा राजकुमारी “सलह कंवर” ने अपने कर्तव्य को निभाने के लिए युद्ध मे जाते हुए अपने पति को अपना सिर काट कर निशानी के रूप मे भिजवा दिया।
“चुण्डावत मांगी सैनाणी, सिर काट दे दियो क्षत्राणी“
हाड़ी रानी (सलह कंवर) का यह रूप देख आज भी लोग सिहर जाते हैं। जिनके बलिदान की यशोगाथा राजस्थान के हर एक अंचल में आज भी सुनाई पड़ती है। राजस्थान में गाया जाने वाला यह गीत मातृभूमि की रक्षा के लिए इस वीरांगना के अमर बलिदान को कहता है। मेवाड़ के स्वर्णिम इतिहास में हाड़ी रानी का नाम अपने स्वर्णिम बलिदान के लिए अंकित है। यह उस समय की बात है जब मेवाड़ पर महाराणा राजसिंह (1652 – 1680 ई०) का शासन था। इनके सामन्त सलुम्बर के राव चुण्डावत रतन सिंह थे। जिनसे हाल ही में बूंदी के हाड़ा चौहान राजपूत सरदार की बेटी से शादी हुई थी। लेकिन शादी के सात दिन बाद ही राव चुण्डावत रतन सिंह को महाराणा राजसिंह सन्देश प्राप्त हुआ था। जिसमें उन्होंने राव चुण्डावत रतन सिंह को दिल्ली से ओरंगजेब की सहायता के लिए आ रही अतिरिक्त सेना को रोकने का निर्देश दिया था। क्योंकि उस दौरान रूपनगर की राजकुमारी चारूमती ने औरंगजेब का विवाह प्रस्ताव ठुकरा कर मेवाड़ के महाराणा राज सिंह को पत्र भेजकर वरण कर लिया था। जिसे पाकर महाराणा राज सिंह ने ससैन्य रूपगनर के लिए प्रस्थान किया और मार्ग में औंरंगजेब को रोकने के लिए सलूम्बर के रावत रतन सिंह को किशनगढ़ के आगे सेना सहित जाने का आदेश शार्दूल सिंह से भिजवाया। युद्ध में जाते समय रावत रतन सिंह अंतिम बार महलों को देखते हैं और सेवक को भेज कर रानी से निशानी लाने को कहते हैं। रानी पत्नी प्रेम में बंधे रावत की विवशता जान कर्तव्य बोध करवाने के लिए अपना शीश काट कर अंतिम निशानी देती हैं।
“पीउ-संदेश, मिल्यो जद वधु, तन मन में उठी।
गयो क्षत्रिय, रगत उफण, बिफर गई, हाड़ी राणी।
खड़ग काढ़, रणचण्डी बण, बार बार, लल्कार उठी।
बोली चर सूँ, लेज़ा, काट शीश, दी सैनाणी।“
रावत रतन सिंह निशानी में रानी का शीश पाकर आहत हो उठे और यूँ कह उठे…
“तूँ भली सैनाणी दी है राणी! है धन्य धन्य तू क्षत्राणी
हूं भूल चुक्यो हो रण पथ ने, तू भलो पाठ दीन्यो राणी “
यह कह आवेशित रावत हाड़ी राणी के शीश की माला पहन औरंगजेब को परास्त करने के लिए सेना सहित प्रस्थान कर गये और चारूमती से विवाह की ठान कर 2 लाख सेना सहित जा रहे औरंगजेब को रास्ते में रोकने में सफल रहे, परन्तु तीन दिन चले युद्ध में चैत्र पूर्णिमा के दिन रावत रतन सिंह बलिदान हो गये। इस नव विवाहित युगल के बलिदान के समाचार सुन महाराणा राजसिंह (1653-1681) नत मस्तक हो बोल पड़े….
“अरि-दल उतार, असि घाट, हरख्यों, जय लख, चुड़ावत।
खेत रह्यो, कट,मुगल-दल, सुण, हुयो, गद् गद्, राणों।
आत्म-बलि, नवल-वधु लख, बोल्यो बिलख, विदुर्-रावत।
धन्य हुई, हाड़ी राणी, दे तू खूनी- निजरानों।
बून्दा मीणा ने बूंदी की स्थापना की थी, तभी से इसका नाम 'बूंदी' हो गया। 24 जून 1242 को राजपूत हाड़ा चौहान अग्निकुल वंशज राव देवा ने इसे मीणा सरदारों से जीता और बूंदी राज्य की स्थापना की। बूंदी के स्वंतत्र राज्य की स्थापना 1342 में देवीसिंह हाड़ा ने की थी। कोटा पूर्व में कोटियाभील के नियन्त्रण के कारण कोटा कहलाया। कोटा में स्वंतत्र राज्य की स्थापना 1631 में माधोसिंह हाड़ा ने की।
राव सलुम्बर के चुंडा ने मांगी एक निशानी थी,
शीस काट कर भेजा जिसने, वह तो हाडी राणी थी |
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