07/04/2026
पटना SSP के फोन कीं घंटी बजती है, लाइन पर थे बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री! मुख्यमंत्री ने SSP से कुछ सवाल पूछे, जिसके जवाब में SSP के बोल थे- “सर, आप इस मामले में मत पड़िए, इसमें इतनी तेज आग है की आपके हाथ जल जाएँगे!” मुख्यमंत्री ने चुपचाप फोन रख दिए।
आज कहनी में बिहार के सबसे चर्चित Super cop रहे IPS अधिकारी की जिसने मुख्यमंत्री तक को हड़काया, जिसने बड़े-बड़े Don तक कीं परेड करा दी। नाम था उनका “किशोर कुणाल” और जो तत्कालीन मुख्यमंत्री थे, उनका नाम था जगन्नाथ मिश्रा!
श्वेतानिशा त्रिवेदी, जो तत्कालीन विधान परिषद में एक टाइपिस्ट थी। उस समय के तत्कालीन विधानपरिषद के सभापति की गोद ली हुई बेटी भी थी। फेमस नाम था बॉबी!
8 मई 1983 को बॉबी की संदिग्ध हालत मे मृत्यु हुई और 4 घंटे के अंदर शरीर को आनन-फ़ानन दफ़ना दिया गया।
ख़बर तुल पकड़ीं, अख़बार की सुर्ख़ियाँ बनी, SSP किशोर कुणाल ने इसी खबर के आधार पर जाँच शुरू की और अदालत से आदेश लेकर, बॉबी की कब्र खोद कर लाश निकाली गई और उसे जाँच के लिए भेजा गया। बिहार से लेकर पूरे देश में हड़कंप मच गया। बिहार के मंत्री, विधायक यहाँ तक मुख्यमंत्री तक की कुर्सी हिल गई!
जाँच के रिपोर्ट आए, जिसमें कहा गया की उनकी मौत मैलाथियान नामक ज़हरीली कीटनाशक के कारण हुई। नेताओं के हाथ-पैर फुलने लगे। इतना दबाव बना की केस किशोर कुणाल से लेकर CBI को सौंप दिया गया…..
CBI ने बाद मे कहा की यह हत्या नहीं आत्महत्या है और सभी दोषियों को क्लीन चिट दे दिया। इस कांड में कांग्रेस नेता राधानंदन झा के बेटे रघुवर झा का नाम प्रमुखता से सामने आया था।
बाद में किशोर कुणाल ने अपनी पुस्तक “दमन तक्षकों का” में लिखते हैं की कैसे मुख्यमंत्री पर दबाव बना 44 विधायक और 2 मंत्री ने केस को CBI को ट्रांसफ़र करवाया।
अब कहानी को दुसरी तरफ मोड़ते हैं। सादे लिबास में ट्रेन से सफ़र कर रहे कुणाल कुछ यात्रियों की की बातें सुनी यात्री कह रहे थे- इस मंदिर की बदहाली को कौन ठीक करेगा, आए दिन यहाँ चढ़ावे चोरी ही हो जाते हैं। जो इस मंदिर को ठीक करेगा वही असल मायने में सुधारक होगा। इसे किशोर कुणाल बड़े ध्यान से सुन रहे थे, फिर मन ही मन संकल्प लिया।
30 अक्टूबर 1983 को मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ हुआ……… And rest is history!
आज जब बिहार में अनेकों कांड होते देखता हूँ और पुलिस मूक दर्शक और नेताओं के इशारे पर चलने वाले बस कठपुतली बने रहते हैं तो किशोर कुणाल की पुलिसिंग याद आती है।
एक पोस्ट में उनकी कहानी बताना संभव नहीं है। मिलते हैं कहानी के अगले अंक में।
कैसी लगी कहानी कमेंट कर के ज़रूर बताएँ।
30/01/2026
आँख फाड़कर पढ़ लो। आँख ख़राब हो तो चश्मा लगाकर पढ़ लो। वो कड़वी सच्चाई लिख रहा हूं जिसे लिखने में पत्रकारों के हाथ काँपते हैं!..
सामान्य वर्ग ने नरेंद्र मोदी जी को PM बनाने के लिए अपना तन-मन-धन सब समर्पित कर दिया। PM बनने के बाद मोदी जी ने:-
- OBC आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया! सवर्ण आयोग नहीं बनाया। तब भी सामान्य वर्ग मौन रहा
- NEET (AIQ) में OBC को 27% आरक्षण दिए। सामान्य वर्ग ने कोई विरोध नहीं किया
- PM मोदी ने राज्य स्तर पर OBC आरक्षण सुरक्षित किया। 105वां संविधान संशोधन कर राज्यों को अधिकार दिया कि वे अपनी OBC सूची और आरक्षण तय कर सकें। किसी सामान्य वर्ग के व्यक्ति ने विरोध नहीं किया।
- सरकार ने OBC के पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप में बढ़ोतरी की। मेडिकल, इंजीनियरिंग, IIT–IIM में पढ़ने वाले OBC छात्रों को लाभ मिला। सामान्य वर्ग के छात्रों ने विरोध नहीं किया। सामान्य वर्ग के गरीब छात्रों को कोई स्कालरशिप नहीं।
- OBC छात्रों के लिए कोचिंग UPSC, SSC, NEET, JEE के लिए फ्री/सब्सिडी कोचिंग योजनाएँ चलाई गईं। किसी सवर्ण ने विरोध नहीं किया
अब आप UGC के काले नियम लेकर आ गए? इससे सीधे सीधे सामान्य वर्ग के छात्रों को शिकार बनाया जा सकता है?
फिर भी सामान्य वर्ग आपको वोट देता रहा, सामान्य वर्ग हिंदू एकता के लिए आपको PM बनाए रखा।
- आज सामान्य वर्ग से हिंदू एकता के लिए किए गए कार्य पूछे जा रहे हैं? उन पर सवाल खड़े किए जा रहें हैं? हमारे ऊपर सवाल उठाने से पहले अपने गिरेबान पर झांके
- मेरी एक बात को कोई ग़लत साबित कर दे .....
29/01/2026
UGC
जिंदगी भर भाजपा समर्थक होने का ये मैडल मिला। हमारे बच्चों के लिए U G C Act.
U -उल्टी
G - गिनती
C - चालू
💪🏻 #मेरी_भूल_कमल_का_फूल
28/11/2025
आज के ही दिन मै और मेरी धर्मपत्नी दोनों लोगों का जन्म हुआ था केवल वर्ष का अंतर था मै अपने आप को सौभाग्य शाली मानता हूँ वस् आपलोगों की और ईश्वर की आशीर्वाद बनी रहे यही प्रार्थना करता हूँ।
21/11/2025
कश्मीर 1990 की रात कोई अकेली घटना नहीं थी।
उसकी शुरुआत मस्जिदों की धमकियों से नहीं—दिल्ली की एक राजनीतिक भूल से हुई थी।
1989 में रुबिया सईद का अपहरण हुआ और आतंकियों ने पाँच कट्टर आतंकवादियों की रिहाई माँगी:
Abdul Hamid Sheikh, Sher Khan, Noor Mohammad Kalwal, Altaf Ahmed, Javed Ahmed Jargar।
फारूक अब्दुल्ला चीख–चीखकर चेतावनी दे रहे थे कि यह कश्मीर में आतंकवाद की बाढ़ खोल देगा।
उन्होंने विरोध में मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया।
इतिहास में ऐसा त्याग आज तक दुबारा नहीं हुआ।
लेकिन भाजपा?
जो वीपी सिंह सरकार को सांस–सांस पर पकड़े बैठी थी?
वह चुप रही।
सरकार गिराई जा सकती थी।
फैसला रोका जा सकता था।
आतंकियों की रिहाई रोकी जा सकती थी।
लेकिन भाजपा चुप रही—क्योंकि उसे पता था कि कश्मीर की आग उसकी भविष्य की राजनीति का ईंधन बनेगी।
यही “रुबिया मॉडल” आगे जाकर कश्मीर को जला गया।
उसी के बाद कश्मीरी पंडितों के घरों पर धमकियाँ आईं।
उसी के बाद लाउडस्पीकरों पर नारे बजे।
उसी के बाद पंडितों का पलायन हुआ।
केंद्र सरकार, जो भाजपा के समर्थन पर खड़ी थी,
कश्मीरी पंडितों की रक्षा में भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी असफलता बनी।
इतिहास यही कहता है।
बाकी सब कहानी है।
लेकिन भाजपा ने इस मॉडल को यहीं नहीं छोड़ा।
दस साल बाद कंधार में तीन खूंखार आतंकवादी छोड़े गए:
Masood Azhar, Mushtaq Zargar, Ahmed Omar Saeed Sheikh।
मसूद अजहर की रिहाई ने जैश-ए-मोहम्मद बनाया।
और फिर हुआ—
संसद हमला
पठानकोट
उरी
पुलवामा
कश्मीर के सैकड़ों हत्याकांड।
मुंबई 26/11 में भी इन्हीं नेटवर्कों की लॉजिस्टिक और भर्ती मशीनरी लगी।
यानी 1989 और 1999 की रिहाई ने अगले 25 वर्षों की लगभग हर बड़ी आतंकी घटना को जन्म दिया।
अगर यह कम नहीं था, तो पंजाब का अध्याय देखिए।
अकाली–भाजपा सहयोगी सरकार ने कहा “पंजाब की धरती पर खून नहीं बहेगा”,
और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई रोक दी।
एक संयुक्त सचिव “लाल” ने एयरपोर्ट बैरिकेडिंग हटवा दी—
क्या यह केंद्र की अनुमति के बिना संभव था?
कभी नहीं।
कश्मीर
पंजाब
कंधार
संसद
मुंबई
पठानकोट
पुलवामा
ये सब अलग-अलग केस नहीं हैं।
यह एक ही राजनीतिक श्रृंखला है।
एक ही सोच।
एक ही निरंतरता।
सत्ता के लिए आतंकवाद को “उपयोगी संकट” बनाना।
कश्मीर की आग पाकिस्तान ने लगाई—
लेकिन ईंधन भारत की राजनीति ने दिया।
और वह राजनीति भाजपा की बैसाखी पर चल रही थी।
1989 की गलती
1990 की त्रासदी
1999 का कंधार
2001 से 2019 तक का रक्तपात—
यह कोई दुर्घटना नहीं, एक संगठित राजनीतिक प्रवृत्ति है।
आज वही प्रवृत्ति देश को गृहयुद्ध की दहलीज तक ले आई है।
क्योंकि जब इतिहास अधूरा बताया जाता है,
तो राजनीति राक्षस बनकर उठती है—
और संघ का यह राक्षस–बच्चा भाजपा
भारत को उसी अंधे मोड़ पर ले आई है।
यह इतिहास है—तेज़, साफ़ और निर्विकार।
बाकी सब सिर्फ़ कहानी है।
14/11/2025
Election commission is sold out
They didnot stop BJP from distributing 10000 per woman as bribery for vote
Another is negative campaign
Thirdly the opposition was not in unison
The politics is in rural area unfortunately few partners in Bihar don't understand rural bihar and ground realities
Until and unless the congress does not strengthen its cadre at booth level, it is difficult to get bumper votes
लड़के के बाप को दस लाख नगद, गाड़ी, बरातियों का स्वागत पान पराग से करने के बाद.. बेटी को बिदा करते दो हजार का खोइछा दिया जाता है ।
आते जाते माँ सास ससुराल वालो को हजार पाँच सौ ऐसे पकड़ाते है जैसे भीख दे रहे हो।
वहाँ महिलाओं को दिया गया दस हजार एक बड़ी रकम है..।।
रिश्वत है
जनता को पैसा बुरा नहीं लगता
जिस दिन ये हुआ था उसी दिन ये रिजल्ट आउट हो चुका था।
02/11/2025
Congratulations 🎊 to our women's cricket team we are world champion 🏆
15/10/2025
आज पूरा देश भारत रत्न, मिसाइल मैन डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साहब को उनकी जयंती पर नमन कर रहा है। डॉ. कलाम साहब ने यह दिखाया कि साधारण परिवार से निकलकर भी मेहनत, ईमानदारी और देशप्रेम के बल पर आसमान की ऊँचाइयाँ छुई जा सकती हैं। उनका सपना था — विकसित भारत — और वही सपना आज हमारा संकल्प है। उनकी जयंती पर कोटि-कोटि श्रद्धांजलि 🙏 जय हिंद 🇮🇳