02/06/2026
प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की गरिमामयी उपस्थिति में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के अंतर्गत युवा संगम चरण-6 के तहत आज जन भवन में अरुणाचल प्रदेश से आए प्रतिनिधि मंडल के साथ एक विशेष संवाद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के दौरान अरुणाचल प्रदेश की समृद्ध कला एवं संस्कृति, पारंपरिक खानपान, प्रमुख पर्यटन स्थलों तथा राज्य में हो रहे अद्यतन विकास को दर्शाती एक आकर्षक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसने उपस्थित जनों को उत्तर-पूर्व भारत की विशिष्ट पहचान से परिचित कराया। इसके उपरांत अरुणाचल प्रदेश से आए प्रतिनिधि मंडल द्वारा राज्य के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत एवं आर्थिक परिदृश्य पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।
कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के छात्र-छात्राओं द्वारा पारंपरिक लोक नृत्य की मनोहारी सामूहिक प्रस्तुति दी गई। साथ ही, राज्य के थीम सॉन्ग पर भी सामूहिक गायन प्रस्तुत किया गया। राज्यपाल जी ने सभी प्रस्तुतिकरण की सराहना करते हुए उसे मनमोहक बताया।
राज्यपाल जी ने कहा कि इस प्रकार की प्रस्तुतियां न केवल विभिन्न राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सजीव रूप में प्रस्तुत करती हैं, बल्कि उन्हें प्रत्यक्ष रूप से देखने एवं अनुभव करने की इच्छा भी जागृत करती हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि इन प्रस्तुतियों को देखकर अरुणाचल प्रदेश जाने की उनकी इच्छा और प्रबल होती है तथा पूर्वाेत्तर भारत के प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक वैभव को देखने की आवश्यकता है।
इस क्रम में राज्यपाल जी ने अपने अरुणाचल प्रदेश के भ्रमण की स्मृतियों को साझा करते हुए वहां की प्राकृतिक सुंदरता का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में लगभग प्रत्येक पाँच किलोमीटर की दूरी पर कोई न कोई नदी प्रवाहित होती दिखाई देती है, जो वहां के वातावरण को अत्यंत रमणीय बनाती है। उन्होंने बताया कि वहां का दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है, जहां बादल इतने समीप होते हैं कि वे ऊपर से गुजरते प्रतीत होते हैं और कई बार घने बादलों के कारण यातायात को भी रोकना पड़ता है।
उन्होंने तवांग जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थान अपनी अद्वितीय प्राकृतिक छटा एवं आकर्षण के कारण फिल्म निर्माण के लिए भी लोकप्रिय है, जहां अनेक फिल्मों की शूटिंग की जाती रही है। उन्होंने यह भी बताया कि वहां शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने की एक विशिष्ट परंपरा है, जिसमें लोग पत्थर एकत्रित कर निर्धारित स्थलों पर अर्पित करते हैं।
इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल जी ने शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित युवा संगम कार्यक्रम को भारत की आत्मा को समझने और उसे आत्मसात करने का एक अभिनव अभियान बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल पूर्वाेत्तर की सुरम्य वादियों से लेकर गंगा-गोमती की पावन धरती तक लोगों को जोड़ने का एक सजीव और सशक्त प्रयास है। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शी सोच “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” को साकार करने में इस प्रकार की पहलों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आप युवा भारत की विविधता के सजीव दूत हैं। आपमें वह ऊर्जा है, जो सीमाओं को मिटाकर संबंधों का नया मानचित्र रच सकते हैं। युवा संगम कार्यक्रम युवाओं के विचारों को विकसित करेगा, उनके अनुभवों को समृद्ध करेगा तथा उनके दृष्टिकोण को वैश्विक बनाएगा।
राज्यपाल जी ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जहां हर कोस पर भाषा बदलती है और हर क्षेत्र में परंपराएं अपना स्वरूप बदलती हैं, किंतु हमारी विविधता में कोई विभाजन नहीं है। हमारी विविधता एक इंद्रधनुष के समान है, जो भारत की पहचान को और अधिक उज्ज्वल बनाती है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश को काशी की आध्यात्मिकता, अयोध्या की आस्था तथा मथुरा-वृंदावन की भक्ति से ओत-प्रोत बताया। साथ ही, अरुणाचल प्रदेश को तवांग मठ की शांति, ज़ीरो वैली की हरितिमा तथा उसके अनछुए प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध बताया, जो मन को आकर्षित करता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की चिकनकारी कला एवं कथक नृत्य तथा अरुणाचल प्रदेश की जनजातीय परंपराओं, लोक नृत्यों और त्योहारों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यही विविधता भारत की असली शक्ति है।
इस अवसर पर राज्यपाल जी ने भारत को संस्कृतियों का संगम, परंपराओं का महासागर और मानवता का जीवंत मंदिर बताया। उन्होंने कहा कि “सेवा परम धर्मः” हमें अपने अस्तित्व से ऊपर उठकर मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करता है। भारत की संस्कृति “वसुधैव कुटुंबकम” का संदेश देती है, जिसका अर्थ है कि संपूर्ण विश्व हमारा परिवार है। यहां सीमाएं नहीं, संवेदनाएं जुड़ती हैं; भिन्नताएं नहीं, भावनाएं बोलती हैं। उन्होंने कहा कि हमारे समाज का स्वाभाविक चरित्र सेवा, समर्पण और सह-अस्तित्व पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि आज की दुनिया अभूतपूर्व गति से बदल रही है और नया भारत केवल परिवर्तन का सहभागी ही नहीं, बल्कि उसका नेतृत्वकर्ता भी बन रहा है। डिजिटल क्रांति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भारत तीव्र गति से प्रगति करते हुए नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसे विजन के साथ आगे बढ़ रहा है, जो भविष्य को केवल देखता ही नहीं, बल्कि उसे गढ़ता भी है, और इस परिवर्तन के सबसे बड़े वाहक देश के युवा हैं। आज हमारे युवा स्टार्टअप्स के माध्यम से नवाचार की नई इबारत लिख रहे हैं।
युवाओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि उनकी सफलता में परिवार का स्नेह, गुरुजनों का मार्गदर्शन और समाज का सहयोग निहित होता है। अतः जब वे ऊंचाइयों को स्पर्श करें, तो उनका दायित्व परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह सफलता अधूरी है, जो केवल स्वयं तक सीमित हो; पूर्ण वही है, जो समाज को भी आलोकित करे।
राज्यपाल जी ने कहा कि आज भारत केवल अवसरों की भूमि ही नहीं, बल्कि अवसरों का सृजनकर्ता बन चुका है। माननीय प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शी पहल के परिणामस्वरूप नीदरलैंड, स्वीडन तथा संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के साथ व्यापार समझौते एवं अन्य महत्वपूर्ण साझेदारियां स्थापित हुई हैं, जो भारत के युवाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को प्राप्त करने के लिए देश विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर निवेश कर रहा है, जिससे नई संभावनाएं सृजित हो रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में देश में स्वरोजगार और उद्यमिता की नई संस्कृति विकसित हुई है तथा भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।
उन्होंने कहा कि हमारी सबसे बड़ी शक्ति हमारी एकता है। जब विभिन्न राज्यों के युवा एक-दूसरे से जुड़ते हैं, तो राष्ट्र निर्माण का एक सशक्त सेतु तैयार होता है। जब हम एक-दूसरे की संस्कृति को समझते हैं, उनकी परंपराओं को अपनाते हैं और उनकी तकनीकी प्रगति से सीखते हैं, तब हम केवल स्वयं को ही नहीं, बल्कि पूरे भारत को सशक्त बनाते हैं। उन्होंने कहा कि युवा संगम जैसे कार्यक्रम केवल आयोजन नहीं, बल्कि एक सशक्त माध्यम हैं, जो भारत की विविधता को एकता में परिवर्तित करते हैं और युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ते हैं।
राज्यपाल जी ने सभी से यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे एक-दूसरे की शक्तियों को पहचानेंगे, विविधताओं को अपनी ताकत बनाएंगे और मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करेंगे, जो न केवल विकसित हो, बल्कि वैश्विक स्तर पर नेतृत्वकर्ता भी बने। उन्होंने कहा कि हम ऐसा भारत बनाएं, जो अपने संस्कारों से महान हो, अपने नवाचारों से अग्रणी हो और अपने युवाओं की ऊर्जा से विश्व का मार्गदर्शक बने।
इस अवसर पर अरूणाचल प्रदेश से आये प्रतिनिधिमण्डल ने राज्यपाल जी को शॉल व जैकेट आदि पहनाकर सम्मानित किया।

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