Khadi and Village Industries Commission

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Khadi Village Industries Commission | Ministry of MSME, Govt. of India of India.

Khadi & Village Industries Commission is a statutory body created by KVIC Act 1956 (No. 61 of 1956) amended by Act No. 12 of 1987 and Act No. 10 of 2006. KVIC was established in April 1957 by taking over the work of former All India Khadi & Village Industries Board. It functions under the administrative control of the Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises, Govt.

05/06/2026

खादी ग्रामोद्योग: ग्रामीण समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत की नई ताकत! 🇮🇳

माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के विजन ने खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र को अभूतपूर्व गति प्रदान की है। आज यह क्षेत्र केवल पारंपरिक उद्योग नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार बन चुका है।

खादी ग्रामोद्योग की इस सफलता का प्रमाण इसके उत्पादन में हुई रिकॉर्ड वृद्धि है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में खादी ग्रामोद्योग का कुल उत्पादन ₹1.25 लाख करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है। यह पिछले वर्षों की तुलना में 380% की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है, जो देश के लाखों कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और ग्रामीण उद्यमियों की मेहनत का परिणाम है।

यह उपलब्धि केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, स्थानीय उद्योगों के पुनर्जागरण और स्वदेशी उत्पादों के प्रति बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। खादी ग्रामोद्योग आज लाखों परिवारों की आजीविका का आधार बनकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

आइए, स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर ग्रामीण भारत की इस विकास यात्रा को और गति दें तथा आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त बनाएं।





05/06/2026

माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प ने खादी को जन-जन तक पहुंचाया है। यही कारण है कि खादी ग्रामोद्योग की कुल बिक्री ₹31,154 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड ₹1,87,105 करोड़ तक पहुंच गई है।

यह सिर्फ आंकड़ों की वृद्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की समृद्धि, स्वदेशी के प्रति बढ़ते विश्वास और लाखों कारीगरों के सशक्तिकरण की कहानी है।




05/06/2026

This World Environment Day, choose a fabric that breathes with nature.

Every single thread of Khadi is a commitment to a greener planet. Handspun and handwoven, Khadi is an organic fabric that releases zero carbon footprint and is dyed using the pure colors of nature. It’s not just a textile; it is a sustainable, ethical, and timeless philosophy.

Let’s weave a sustainable future together. Choose Khadi, Protect Nature.





04/06/2026

आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के दूरदर्शी नेतृत्व, कुशल मार्गदर्शन और ‘लोकल फॉर वोकल’ के मूलमंत्र ने आज पारंपरिक खादी को एक वैश्विक पहचान और नई ऊर्जा से भर दिया है। पिछले 12 वर्षों का सफ़र गवाह है कि किस तरह देश की खादी ने विकास की एक नई और प्रेरणादायक गाथा लिखी है।

हमारे समर्पित कारीगरों व बुनकरों के अद्वितीय परिश्रम और सरकार की लोक-कल्याणकारी नीतियों के ऐतिहासिक समन्वय से वित्तीय वर्ष 2025-26 में खादी का कुल उत्पादन ₹3,974 करोड़ के गौरवपूर्ण स्तर पर पहुँच गया है। यह शानदार उपलब्धि महज़ आर्थिक विकास का आंकड़ा नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में आ रहे सामाजिक-आर्थिक बदलाव और स्वदेशी के प्रति देशवासियों के बढ़ते अटूट विश्वास का सजीव प्रमाण है।

04/06/2026
04/06/2026

आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘लोकल फॉर वोकल’ के मंत्र को आत्मसात करते हुए देश का खादी ग्रामोद्योग आज देश की स्वदेशी क्षमता का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर उभरा है। पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक विज़न के इस बेहतरीन तालमेल ने देश के विनिर्माण क्षेत्र को एक नई और ऐतिहासिक गति दी है।
इसी अभूतपूर्व प्रयास का परिणाम है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में खादी ग्रामोद्योग का कुल उत्पादन ₹1.25 लाख करोड़ के पार पहुँच चुका है, जो कि 380% की एक ऐतिहासिक और रिकॉर्ड बढ़ोतरी है। उत्पादन के ये जादुई आंकड़े दर्शाते हैं कि किस तरह देश के ग्रामीण अंचलों में छिपी प्रतिभा और कौशल को आज एक सही दिशा और बड़ा वैश्विक मंच मिल रहा है।

04/06/2026

आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'लोकल फॉर वोकल' के दूरदर्शी विज़न को धरातल पर उतारते हुए आज देश का खादी ग्रामोद्योग प्रगति के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। यह सिर्फ एक उद्योग नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की एक मूक क्रांति बन चुका है।

इसी अभूतपूर्व विकास का परिणाम है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में खादी ग्रामोद्योग से मिलने वाला कुल रोजगार 2 करोड़ के पार पहुँच चुका है। यह ऐतिहासिक आंकड़ा देश के करोड़ों परिवारों को मिलने वाले स्वावलंबन, नए अवसरों और आत्मसम्मान का सबसे बड़ा प्रमाण है।

04/06/2026

माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश "लोकल फॉर वोकल" और "आत्मनिर्भर भारत" के संकल्प को सच कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में देश की पारंपरिक खादी ने विकास की एक नई और ऐतिहासिक परिभाषा लिखी है।

ग्रामीण भारत के सामर्थ्य और बुनकरों की मेहनत का सबसे बड़ा प्रमाण हमारे सामने है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में खादी ग्रामोद्योग की कुल बिक्री ₹31,154 करोड़ के स्तर से कई गुना बढ़कर ₹1,87,105 करोड़ के रिकॉर्ड और अभूतपूर्व आंकड़े पर पहुंच चुकी है। यह केवल व्यापारिक आंकड़े नहीं हैं बल्कि गांवों की लाखों माताओं, बहनों और कारीगरों के जीवन में आए आर्थिक सुधार, खुशहाली और आत्मसम्मान का सबसे बड़ा प्रतीक हैं। चरखे और करघे की यह गूंज आज नए भारत की स्वदेशी अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हुए वैश्विक मंच पर देश का गौरव बढ़ा रही है।

03/06/2026

माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के दूरदर्शी नेतृत्व, मार्गदर्शन और “वोकल फॉर लोकल” के मंत्र ने खादी को नई पहचान और नई ऊर्जा प्रदान की है।

पिछले 12 वर्षों में खादी ने विकास की एक प्रेरणादायक गाथा लिखी है। देश के लाखों कारीगरों और बुनकरों के परिश्रम तथा सरकार की जनहितकारी नीतियों के परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2025-26 में खादी उत्पादन बढ़कर ₹3,974 करोड़ तक पहुंच गया है।

यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, ग्रामीण समृद्धि और स्वदेशी के प्रति बढ़ते जनविश्वास का सशक्त प्रमाण है। आज खादी भारत की विरासत के साथ-साथ विकसित भारत के संकल्प की भी पहचान बन चुकी है।





03/06/2026

खादी: विरासत का गौरव, आत्मनिर्भर भारत की पहचान! 🇮🇳

माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प ने खादी को एक नई ऊँचाई प्रदान की है। कभी केवल सादगी और स्वदेशी भावना का प्रतीक रही खादी आज आधुनिक भारत की पहचान बनकर फैशन, रोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन चुकी है।

खादी की बढ़ती लोकप्रियता इसकी सफलता की कहानी स्वयं बयां करती है। वित्तीय वर्ष 2013-14 में खादी की बिक्री ₹1,081 करोड़ थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹7,868 करोड़ से अधिक हो गई है। 620% से ज्यादा की यह अभूतपूर्व वृद्धि दर्शाती है कि देशवासियों ने स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के साथ-साथ लाखों ग्रामीण कारीगरों, बुनकरों और महिला उद्यमियों के सपनों को भी नई उड़ान दी है।

खादी आज केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय कौशल और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित कर यह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

आइए, खादी को अपनाकर स्वदेशी के इस जनआंदोलन को और मजबूत बनाएं तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।





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